मेरी कलम से: रुकता नहीं तमाशा रहता है खेल जारी मेरी कलम से: रुकता नहीं तमाशा रहता है खेल जारी
सूर्यभानु गुप्त रुकता नहीं तमाशा रहता है खेल जारी। उस पर कमाल यह है दिखता नहीं मदारी। चलिए  शुरू करते हैं। घोड़े गधे में... मेरी कलम से: रुकता नहीं तमाशा रहता है खेल जारी

सूर्यभानु गुप्त

रुकता नहीं तमाशा रहता है खेल जारी। उस पर कमाल यह है दिखता नहीं मदारी। चलिए  शुरू करते हैं। घोड़े गधे में फर्क होता है । इनकी लीद में फर्क होता है। जानना बाकी था। गधे की लीद का तड़का। भक्तों का अंग-अंग फड़का। चलिए आगे बढ़ते हैं। मुझे लगता है खाद्य विभाग को दिवाली का तड़का नहीं लगाया था मसाला वाले ने। वैसे एक बात बता दे अपने जिले में मिलावट का सामान नहीं मिलता। यकीन ना हो तो देख लीजिए सारा त्यौहार बीत गया ।कहीं नकली मावा नहीं मिला। फिजिक्स के मास्टर साहब कहते थे रहोगे गधे के गधे। इंतकाल हो गया उनका ।नहीं तो बताता गधे की क्या कीमत है। गधा गधा नहीं है। पैसा कमाने की मशीन बन गया। चलिए हाथरस में मसाला फैक्ट्री और हापुड़ में एक मजदूर का 37 लाख रुपया बिजली बिल बकाया निकाला गया है। हर सप्ताह बिजली बिल ठीक करने का अभियान चलाया जाता है। पता नहीं इस मजदूर का ठीक हुआ कि नहीं।गजबे विभाग है। कुछ लोग कहते थे आलू से सोना बनाने की मशीन।₹5 के आलू चिप्स  मैं कुलग्राम 16 होता है। जोड़ लीजिए सोना बन रहा है कि नहीं। यही बात किसान आंदोलन पर लागू होती है।₹5 का गोभी बाजार में आकर 25 का हो जाता है।किसान आंदोलन की बात इतने से समझ लीजिए। 2020 बीत रहा है। कैलेंडर देखिए जनवरी-फरवरी थोड़ी बिक्री चालू हुई ।मार्च अप्रैल लॉकडाउन  मईथोड़ा खुला जून-जुलाई बरसात अगस्त से सितंबर शादी ब्याह। अक्टूबर-नवंबर दिसंबर आधा शादी ब्याह। आधे में शीतलहर। बाकी आने दीजिए। संभल कर । रहिएगा जय श्री राम। वैसे एक बड़े आदमी की बात है। ठंड और बेइज्जती महसूस करने पर ज्यादा लगती है।

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