नैतिक मूल्यों को आत्मसात् करने की जरूरतः  प्रो. अजय प्रताप सिंह नैतिक मूल्यों को आत्मसात् करने की जरूरतः  प्रो. अजय प्रताप सिंह
अयोध्या। डाॅ0 राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के विधि विभाग में अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस के उपलक्ष्य में एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि अवध विश्वविद्यालय के मुख्य नियंता प्रो0 अजय प्रताप सिंह ने कहा कि मानवाधिकारों के संरक्षण के लिए राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर मानवाधिकार आयोगों का गठन किया गया है किंतु आयोग को केवल परामर्शदात्री अधिकारिता ही प्रदान की गई है। मानवाधिकार सिर्फ पुस्तकों में उल्लिखित कर दिए जाने से लागू नहीं किए जा सकते इसके अनुपालन के लिए समग्र नीति बनानी होगी। उन्होंने मानवाधिकार और नैतिक मूल्यों के संबंध पर प्रकाश डालते हुए नैतिक मूल्यों को आत्मसात करने पर बल दिया।        कार्यक्रम में मुख्य वक्ता विधि संकायाध्यक्ष डॉ0 अशोक कुमार राय ने मानवाधिकार की संकल्पना एवं परिभाषा पर प्रकाश डालते हुए बताया कि मानवाधिकार को परिभाषित करने से पूर्व मानव को परिभाषित किया जाना जरूरी है। आतंकवादी, दुराचारी और एक सज्जन व्यक्ति के मानवाधिकार में अंतर करने की आवश्यकता है। दोनों के मानवाधिकार समान नहीं हो सकते। उन्होंनें मानवाधिकारों की जड़ों को अत्यंत प्राचीन बताते हुए कहा मानवाधिकार एक नैसर्गिक अधिकार है, कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे भौतिकी एवं इलेक्ट्रानिक्स विभाग के प्रो0 राजकुमार तिवारी ने मानवाधिकार की संकल्पना पर प्रकाश डालते हुए इसके क्रियान्वयन पर बल दिया। उन्होंने बताया कि मानवाधिकार मानवता की विधि है।  कार्यक्रम का शुभारम्भ माॅ सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्जवलन के साथ किया गया। अतिथियों का स्वागत पुष्पगुच्छ प्रदान कर किया गया। कार्यक्रम का संचालन डॉ0 अजय कुमार सिंह ने किया। धन्यवाद ज्ञापन पाठ्यक्रम के  समन्वयक डॉ0 त्रिभुवन शुक्ला द्वारा किया। इस अवसर पर प्रो0 विनोद कुमार श्रीवास्तव, प्रो0 शैलेंद्र कुमार, डॉ0 अनिल कुमार यादव, डॉ0 के के बाजपेई, डॉ0 संतोष पाण्डेय, डॉ0 शैल सुता, बीपेंद्र पाण्डेय सहित अन्य छात्र-छात्राएं उपस्थित रही। नैतिक मूल्यों को आत्मसात् करने की जरूरतः  प्रो. अजय प्रताप सिंह

अयोध्या। डाॅ0 राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के विधि विभाग में अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस के उपलक्ष्य में एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि अवध विश्वविद्यालय के मुख्य नियंता प्रो0 अजय प्रताप सिंह ने कहा कि मानवाधिकारों के संरक्षण के लिए राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर मानवाधिकार आयोगों का गठन किया गया है किंतु आयोग को केवल परामर्शदात्री अधिकारिता ही प्रदान की गई है। मानवाधिकार सिर्फ पुस्तकों में उल्लिखित कर दिए जाने से लागू नहीं किए जा सकते इसके अनुपालन के लिए समग्र नीति बनानी होगी। उन्होंने मानवाधिकार और नैतिक मूल्यों के संबंध पर प्रकाश डालते हुए नैतिक मूल्यों को आत्मसात करने पर बल दिया।

       कार्यक्रम में मुख्य वक्ता विधि संकायाध्यक्ष डॉ0 अशोक कुमार राय ने मानवाधिकार की संकल्पना एवं परिभाषा पर प्रकाश डालते हुए बताया कि मानवाधिकार को परिभाषित करने से पूर्व मानव को परिभाषित किया जाना जरूरी है। आतंकवादी, दुराचारी और एक सज्जन व्यक्ति के मानवाधिकार में अंतर करने की आवश्यकता है। दोनों के मानवाधिकार समान नहीं हो सकते। उन्होंनें मानवाधिकारों की जड़ों को अत्यंत प्राचीन बताते हुए कहा मानवाधिकार एक नैसर्गिक अधिकार है, कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे भौतिकी एवं इलेक्ट्रानिक्स विभाग के प्रो0 राजकुमार तिवारी ने मानवाधिकार की संकल्पना पर प्रकाश डालते हुए इसके क्रियान्वयन पर बल दिया। उन्होंने बताया कि मानवाधिकार मानवता की विधि है।  कार्यक्रम का शुभारम्भ माॅ सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्जवलन के साथ किया गया। अतिथियों का स्वागत पुष्पगुच्छ प्रदान कर किया गया। कार्यक्रम का संचालन डॉ0 अजय कुमार सिंह ने किया। धन्यवाद ज्ञापन पाठ्यक्रम के  समन्वयक डॉ0 त्रिभुवन शुक्ला द्वारा किया। इस अवसर पर प्रो0 विनोद कुमार श्रीवास्तव, प्रो0 शैलेंद्र कुमार, डॉ0 अनिल कुमार यादव, डॉ0 के के बाजपेई, डॉ0 संतोष पाण्डेय, डॉ0 शैल सुता, बीपेंद्र पाण्डेय सहित अन्य छात्र-छात्राएं उपस्थित रही।

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