छठ महापर्व को लेकर उत्साह छठ महापर्व को लेकर उत्साह
गोसाईगंज। सूर्योपासना का महापर्व छठ बुधवार को नहाय-खाय से शुरू हो रहा है। सरयू नदी समेत सरोवरों-कुंडों में स्नान और कद्दू-भात खाकर महिलाएं इस चार... छठ महापर्व को लेकर उत्साह

गोसाईगंज। सूर्योपासना का महापर्व छठ बुधवार को नहाय-खाय से शुरू हो रहा है। सरयू नदी समेत सरोवरों-कुंडों में स्नान और कद्दू-भात खाकर महिलाएं इस चार दिवसीय महाव्रत का अनुष्ठान शुरू करेंगी। गुरुवार को खरना है।शुक्रवार को महिलाएं पुत्रों के साथ कमर भर पानी में खड़ी होकर अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देंगी। शनिवार को उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ व्रत का पारण होगा। इस दौरान छठ माता को 36 प्रकार के फल चढ़ते हैं। बाजार में फलों की दुकानें सज गईं हैं।  बिहार व पूरब के लोगों में महापर्व को लेकर खासा उत्साह है। व्रती महिलाएं नहाकर सात्विक व शुद्ध भोजन करके व्रत की शुरुआत करेंगी। सूर्यास्त के बाद सूर्य भगवान को भोग लगाकर प्रसाद ग्रहण कर घर के सदस्यों, रिश्तेदारों व पड़ोसियों को प्रसाद वितरण करती है।इस संबंध में नगर पंचायत अध्यक्ष रमेश चंद्र ने बताया कि दोनों स्थानों पर नगर पंचायत द्वारा व्यापक व्यवस्था कराई जा रहीविभिन्न हिंदू शास्त्र-पुराणों में छठ पर्व को लेकर तमाम कथाएं प्रचलित हैं। मान्यता है कि जो भी श्रद्धालु इस महाव्रत को निष्ठा भाव से विधिपूर्वक संपन्न करता है वह संतान सुख से कभी अछूता नहीं रहता और न केवल संतान की प्राप्ति होती है बल्कि उसके सारे कष्ट भी समाप्त हो जाते हैं। पौराणिक शास्त्रों के अनुसार जब पांडव जुए में अपना सारा राजपाट हार गए, तब द्रौपदी ने छठ का व्रत रखा और पांडवों को अपना राजपाट मिल गया। वहीं मार्कण्डेय पुराण के मुताबिक छठ देवी भगवान सूर्यदेव की बहन हैं और उन्हीं को प्रसन्न करने के लिए सूर्य की आराधना गंगा-यमुना या पवित्र नदी किनारे पूजा की जाती है।

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