दीपपर्व का प्रथम उत्सव है धन तेरस दीपपर्व का प्रथम उत्सव है धन तेरस
कार्तिक बदी त्रयोदशी के दिन समुद्रमंथन के फलस्वरूप हाथ में अमृत(elixir)कलश लिए आयुर्वेद के प्रणेता देव चिकित्सक भगवान धन्वंतरि जी का प्राकट्य हुआ था।मंथन... दीपपर्व का प्रथम उत्सव है धन तेरस

कार्तिक बदी त्रयोदशी के दिन समुद्रमंथन के फलस्वरूप हाथ में अमृत(elixir)कलश लिए आयुर्वेद के प्रणेता देव चिकित्सक भगवान धन्वंतरि जी का प्राकट्य हुआ था।मंथन से ही रत्नस्वरूपा माता लक्ष्मी जी विष्णुप्रिया का भी अवतरण हुआ है।
अमृत कलश होने के कारण आज के दिन बर्तन खरीदने का और शीतलता के प्रतीक चंद्रमा को प्रसन्न करने हेतु चांदी के आभूषणों/सिक्कों/देव प्रतिमाओं को क्रय करने की प्रथा है।मान्यता है कि आज के दिन किसान धनिया सहित अन्य प्रकार के बीज खरीदकर दीपावली के पश्चात बोते हैं।जिससे 13 गुना वृद्धि होती है।
दीपपर्व का प्रथम उत्सव है धन तेरस।इस दिन सन्ध्या के समय मुख्य द्वार पर दीपप्रज्वलन करने से माता लक्ष्मी का आशीर्वाद मिलता है,परिवार में आरोग्यता रहती है,समृद्धि आती है।
भगवान महावीर आज के ही दिन योग समाधि में गए थे।जिसके कारण जैन मतावलम्बी इस दिन को धन्य तेरस के रूप में मनाते हैं।
माध्यमिक शिक्षक संघ,अम्बेडकर नगर दीपोत्सव के इस प्रथम पर्व पर अपने समस्त विद्वत श्रेष्ठ विद्वान शिक्षकों/शिक्षा अधिकारियों/निष्पक्ष पत्रकारों/समाजसेवियों/प्रिय विद्यार्थियों व संघ पदाधिकारियों का हृदय से अभिनंदन करता है।

सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामया।

तन्मे मन:मे शिवसंकल्पमस्तु।
-उदयराज मिश्र,अध्यक्ष,माध्यमिक शिक्षक संघ,अम्बेडकरनगर

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