मेरी कलम से : भीड़ से अलग कोई बात होनी चाहिए मेरी कलम से : भीड़ से अलग कोई बात होनी चाहिए
सूर्यभान गुप्त भीड़ से  अलग कोई बात होनी चाहिए। सब रहे खामोश बुत होकर। मगर बोलूंगा मैं।  प्रताप सोमवंशी के शेर से शुरू करते... मेरी कलम से : भीड़ से अलग कोई बात होनी चाहिए

सूर्यभान गुप्त

भीड़ से  अलग कोई बात होनी चाहिए। सब रहे खामोश बुत होकर। मगर बोलूंगा मैं।  प्रताप सोमवंशी के शेर से शुरू करते हैं। चलिए हैदराबाद की एक बच्ची ऐश्वर्या रेड्डी  ने 2 नवंबर को सुसाइड कर लिया। इंटरमीडिएट में 98 परसेंट नंबर लॉकर  टॉप किया था। आगे की पढ़ाई के लिए दिल्ली में थी ।लॉकडाउन में घर आ गई थी । पढ़ाई के लिए लैपटॉप की जरूरत थी।  लिखा पढ़ा भी गया। सोनू सूद तक से सिफारिश की गई। शासन प्रशासन से भी गुहार लगाई गई ।लेकिन प्रशासन ने ध्यान नहीं दिया। बड़ी बहन की पढ़ाई जारी रहे ।इसलिए छोटी बहन ने पढ़ाई छोड़ दिया था। आत्महत्या के कारण भी जान लें। ऑनलाइन पढ़ाई के लिए कंप्यूटर चाहिए था। आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी।आइए जरा पीछे चलते हैं। उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव की सरकार थी। मेधावी छात्र-छात्राओं को लैपटॉप जिले जिले में बांटा गया था। बड़ी आलोचना हुई थी। मजाक भी बनाया गया था। काश 98% पाने वाली हैदराबाद की ऐश्वर्या रेड्डी को भी शासन द्वारा लैपटॉप दिया गया होता। तो आज होनहार ऐश्वर्या  जिंदा रहती। जानकारी के लिए हरियाणा सरकार ने एमबीबीएस के लिए सालाना फीस 1200000 कर दी है। मन बड़ा उदास है ।दीपावली मनाइए। क्या हुआ मिस नहीं होना चाहिए। एक साथी छोड़ कर चला गया। विकल को हार्दिक श्रद्धांजलि।

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