मेरी कलम से: हम जैसे तो सच में भी हकलाते हैं मेरी कलम से: हम जैसे तो सच में भी हकलाते हैं
सूर्यभान गुप्ता जाने कैसे झूठ  फरेब में जी लेते हैं लोग ।हम जैसे तो सच में भी हकलाते हैं। प्रताप सोमवंशी के शेर से... मेरी कलम से: हम जैसे तो सच में भी हकलाते हैं

सूर्यभान गुप्ता

जाने कैसे झूठ  फरेब में जी लेते हैं लोग ।हम जैसे तो सच में भी हकलाते हैं। प्रताप सोमवंशी के शेर से हाजिर हूं।।दीपावली नजदीक है। सेल चालू है। सेल और लीज पर फर्क होता है। लखनऊ का हवाई अड्डा अदानी एयरपोर्ट हो गया। सेल है कि लीज। चलिए नवंबर महीने की शुरुआत झटकेदार हुई है। ज्यादा बैंक आना जाना कम कर दीजिए। निकालने पर भी टैक्स जमा करने पर भी टैक्स। इससे अच्छे दिन और क्या आएंगे। हवाई जहाज का तजुर्बा नहीं। हवाई चप्पल पहनकर जाने की तमन्ना अभी बाकी है। चलिए अमीनाबाद के दवा मार्केट में घूम लेते हैं। आंख में डालने की एक दवा है ।₹13 की थी ₹75 हो गई। ब्लड प्रेशर की दवासिलाकर20.120 से 149 हो गई। अब इससे ज्यादा अच्छे दिन की उम्मीद मत कीजिए। स्वास्थ्य की बात हो रही है तो एक हैं अमेरिकन डॉक्टर विलियम डेविसहृदय रोग विशेषज्ञ। उनकी लिखी एक किताब है जिसमें लिखा गया है गेहूं छोड़ो। गेहूं की जगह पुराने जमाने की ज्वार बाजरा जो खाइए। उनका मानना है कि डायबिटीज हृदय रोग के लिए गेहूं ज्यादा जिम्मेदार है। आगे चलते हैं। फैजाबाद के अस्पताल में प्लेटलेट्स निकालने वाली मशीन फिलहाल लग गई। बाकी 44 डॉक्टर में 22 डॉक्टर की तैनाती है। कई रोगों के विशेषज्ञ डॉक्टर तो है ही नहीं। इस तरफ भी ध्यान दिया जाता तो बेहतर होता। वैसे तेल की चर्चा अभी नहीं की। नास्तिक घोषित कर देंगे। डर सबको लगता है।चलते चलते। एक फौजी भड़क गया। कस्टमर केयर में फोन करके बताया। जो खुद को करोना से नहीं बच पाया। उसकी आवाज मुझे मत सुनाइए। दिन में 20 बार बोलता है हाथ धोना है सैनिटाइज करना है।

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