……सच से हम नादान बहुत थे ……सच से हम नादान बहुत थे
प्रदीप कुमार तिवारी बचपन में अरमान बहुत थे.सच से हम नादाँन बहुत थे. खोया पाया जो भी मैनेकहने में आसान बहुत थे. सपने पूरे... ……सच से हम नादान बहुत थे

प्रदीप कुमार तिवारी

बचपन में अरमान बहुत थे.
सच से हम नादाँन बहुत थे.

खोया पाया जो भी मैने
कहने में आसान बहुत थे.

सपने पूरे हो न सके पर
दिल में दबे तूफान बहुत थे.

मतलब की इस दुनियाँ के
रिस्तो से अनजान बहुत थे.

कीमत बस पैसे वालो की
बाकी तो इंसान बहुत थे.

जिन्दा लाशे लावारिश थी
मुर्दो के शमशान बहुत थे.

‘प्रदीप’वफ़ा की राहो पर
चलने वाले परेशान बहुत थे.

Times Todays News

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