मेरी कलम से: थोड़ा सा गुरूर भी जरूरी है जीने के लिए मेरी कलम से: थोड़ा सा गुरूर भी जरूरी है जीने के लिए
सूर्यभान गुप्ता थोड़ा सा गुरूर भी जरूरी है जीने के लिए, वरना लोग पीठ को पायदान बना लेतेहैं। आइए टाइम्स टुडे पर।एक हैं सूचना प्रसारण... मेरी कलम से: थोड़ा सा गुरूर भी जरूरी है जीने के लिए

सूर्यभान गुप्ता

थोड़ा सा गुरूर भी जरूरी है जीने के लिए, वरना लोग पीठ को पायदान बना लेतेहैं। आइए टाइम्स टुडे पर।एक हैं सूचना प्रसारण मंत्री प्रकाश जावेडकर। उन्होंने घोषणा की है 3 महीने तक टीआरपी नहीं जारी होगी। प्रकाश जी प्रकाश डालें किस को बचाने का प्रयास हो रहा है। चलिए बिहार घूम लेते हैं। जनपद के तमाम दुकानदारों को सामाजिक दूरी का पालन न करने के नाते 1 सप्ताह दुकान सील कर दिया गया।बिहार में खुलेआम सामाजिक दूरी की धज्जियां उड़ रही है सत्ता विपक्ष दोनों शामिल है। कोई बोलने वाला नहीं है। चलिए निजी करण का एक फायदा बता दे। रेलवे ने बुजुर्गों को मिलने वाली छूट समाप्त कर दी। वैसे भी बुजुर्ग घर पर रहे ज्यादा अच्छा होगा।बात कुछ बच्चों की कर ले जाए। दो बच्चे 720 में 720 नंबर लाकर टॉप कर गए। अच्छा होता दोनों को संयुक्त रूप सेटॉपरघोषित किया जाता । बच्चों में  हीन भावनानहीं होने देना चाहिए। एक उदाहरण से समझिए। आईआईटी जेईई का कट ऑफ जरा देखिए। जनरल कैंडिडेट 105 ओबीसी 70एससी 50 और st 44 l अब इसके बाद कुछ कहना शेष नहीं है। इस समय राम लीला का दौर चल रहा है। हमारे यहां पहले बाहर की पार्टी आती थी। पैसा लेकर चली जाती थी।कुछ लोगों ने स्वयं प्रयास किया। ऊंचाई की बुलंदियों पर पहुंच गए। इसका अयोध्या की रामायण से कोई लेना-देना नहीं। लॉकडाउन के समय से लेकर अब तक एक सोनू सूद नाम का फिल्म एक्टर बहुत चर्चित है।लोगों की मदद करने में आगे।और एक हैं करो ना से बचाने वाले। फोन पर। मेराज फैजाबादी के शेर से अपनी बात समाप्त करता हूं। बढ़ गया था प्यास का एहसासदरिया को देखकर।  हम पलट आए मगर पानी को प्यासा देखकर।

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