मेरी कलम से: मुझे आपके प्यार का टीआरपी मिला है मेरी कलम से: मुझे आपके प्यार का टीआरपी मिला है
सूर्यभान गुप्ता रोना कब आसान रहा है दुख की असली वजहो से। कोई और बहाना लेकर आंसू बाहर आते हैं प्रताप सोमवंशी के शेर... मेरी कलम से: मुझे आपके प्यार का टीआरपी मिला है

सूर्यभान गुप्ता

रोना कब आसान रहा है दुख की असली वजहो से। कोई और बहाना लेकर आंसू बाहर आते हैं प्रताप सोमवंशी के शेर से शुरू होता हूं।बताना जरूरी है। टीआरपी के लिए चैनल वाले पैसा दे रहे हैं। मुझे आपके प्यार का टीआरपी मिला है।।मुझे स्वर्गीय राजबली यादव याद आ रहे हैं। नई पीढ़ी को नहीं मालूम होगा ।लेकिन पुराने लोग जानते होंगे। पहले कामरेड राजबली यादव ड्रामा किया करते थे लेखक कलाकार सब खुद ही रहाकरतेथे। उनके ड्रामे में अरहर की दाल जरूर रहती थी।
याद आने का कारण अरहर की दाल 200 के होने पर राजनीतिक दलों की चुप्पी के कारण। राजबली के ड्रामे को रोकने के लिए धारा 144 लगाई जाती थी। स्टाइल बहुत बढ़िया था।  चलिए आगे बढ़ते हैं। आम आदमी की थाली से दाल तो गायब होने जा रहा है। सब्जी का भी बुरा हाल है। आलू ₹40 किलो बिक रहा है। इसके बाद बाकी पूछना नहीं है। आम आदमी पत्ता गोभी के पत्ते की तरह छिलका दर छिलका नंगा होता जा रहा है। एक शेर के साथ अपनी बात समाप्त करता हूं।यहां किस से कहें दुखड़ा अपना। सब के सब पीठ पीछे खंजर  लिए बैठे हैं। चलिए मिलते हैं बाबा के ढाबा पर। दिल्ली को छोड़कर और जगह भी देखिए। हर जगह लाचार बाबा बैठे हैं।उनको भी मदद कीजिए और आखिरी बात सोशल मीडिया ने अपनी ताकत दिखा दी बाबा के ढाबा से और इसकी ताकत सबसे पहले पहचानने की जरूरत महसूस की थी नरेंद्र दास दामोदरदास मोदी प्रधानमंत्री ने

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