ऑन लाइन निबंध एवं क्विज प्रतियोगिता ऑन लाइन निबंध एवं क्विज प्रतियोगिता
राजेश तिवारी राजकीय इण्टर कालेज अकबरपुर में विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस ऑन लाइन निबंध एवं क्विज प्रतियोगिता,वृक्षारोपण तथा अन्य कई कार्यक्रमों के साथ समारोह... ऑन लाइन निबंध एवं क्विज प्रतियोगिता

राजेश तिवारी

राजकीय इण्टर कालेज अकबरपुर में विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस ऑन लाइन निबंध एवं क्विज प्रतियोगिता,वृक्षारोपण तथा अन्य कई कार्यक्रमों के साथ समारोह पूर्वक मनाया गया।
समारोह का शुभारंभ प्रधानाचार्य सुरेश लाल श्रीवास्तव द्वारा माँ सरस्वती की प्रतिमा पर पुष्प माला अर्पित करते हुए किया गया।अपने संबोधन में प्रधानाचार्य ने कहा कि विश्व में मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दों के बारे में जागरूकता बढ़ाने तथा मानसिक स्वास्थ्य के सहयोगात्मक प्रयासों को संगठित करने के उद्देश्य से प्रतिवर्ष 10 अक्टूबर को विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस मनाया जाता है।यह दिवस वैश्विक स्तर पर पहली बार वर्ष 1992 में संयुक्त राष्ट्र संघ के उप महासचिव रिचर्ड हण्टर और वर्ल्ड फेडरेशन फॉर मेन्टल हेल्थ की पहल पर मनाया गया था।
इस वर्ष जिस थीम के रूप में यह दिवस मनाया जा रहा है, वह है-“सभी के लिए मानसिक स्वास्थ्य:अधिक से अधिक निवेश, ज्यादा से ज्यादा पहुँच”गोष्ठी में विचार व्यक्त करते हुए शिक्षक गंगाराम ने कहा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक 4सौ50 मिलियन लोग वैश्विक स्तर पर मानसिक विकार से पीड़ित हैं।सम्प्रति विश्व में 4में से1व्यक्ति किसी न किसी मानसिक विकार या तंत्रिका सम्बन्धी विकारों से प्रभावित है।शिक्षिका उज़मा नाज़ली ने कहा कि जीवन में तनाव की अत्यधिक बोझिलता के कारण मानसिक अस्वस्थता का ग्राफ बढ़ता ही जा रहा है।शिक्षक राम अजोर मौर्य ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य एक संतुलित मनोदशा की स्थिति होती है, जो कि इस समय तमाम कारणों से प्रभावित है।शिक्षक शिव नारायण यादव ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य की बेहतरी में ही हमारी मनोवृत्तियों, रुचियों, अभिक्षमताओं को सुव्यवस्थित विकास का मौका मिलता है।विचार गोष्ठी में अनिल कुमार सिंह व शीला वर्मा ने भी अपने अपने विचार रखे।
संदर्भित विषय पर आयोजित ऑन लाइन निबंध व क्विज प्रतियोगिता में कक्षा12 की पायल शर्मा एवं स्नेहा पाण्डेय(12)क्रमशः प्रथम स्थान पर रहीं, वहीं आकाश दूबे(10)व स्वप्निल उपाध्याय(12) क्रमशः दूसरे स्थान पर रहे।इस अवसर पर विद्यालय में वृक्षारोपण का भी कार्यक्रम हुआ।अंत में प्रधानाचार्य ने कहा कि चूंकि व्यक्तित्व मनोदैहिक गुणों का गत्यात्मक संगठन है, ऐसे में मनोशारीरिक क्षमता एक दूसरे के पूरक हैं।

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