गांधी आश्रम अपने बदहाली पर बहा रहा आंसू गांधी आश्रम अपने बदहाली पर बहा रहा आंसू
सत्यप्रकाश वर्मासंत कबीर नगर।खादी वस्त्र नहीं विचार के सिद्धांत को लेकर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के नाम से गांधी आश्रम की नींव पड़ी।ताकि अधिक से... गांधी आश्रम अपने बदहाली पर बहा रहा आंसू

सत्यप्रकाश वर्मा
संत कबीर नगर।खादी वस्त्र नहीं विचार के सिद्धांत को लेकर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के नाम से गांधी आश्रम की नींव पड़ी।ताकि अधिक से अधिक लोगों को स्वरोजगार मिल सके।इस उद्देश्य को लेकर क्षेत्रीय श्री गांधी आश्रम मगहर की स्थापना की गई।आपसी विवाद के कारण आश्रम आज बदहाली की आंसू बहा रहा है।इस संस्था के कर्मचारियों के समक्ष रोजी-रोटी की समस्या खड़ी हो गई है।


क्षेत्रीय श्री गांधी आश्रम मगहर का कार्य उत्पत्ती केन्द्र में वर्ष 1935 में शुरू हुआ।गांधी आश्रम वजूद में आने से पहले क्षेत्रीय श्री गांधी आश्रम अकबरपुर (वर्तमान में अम्बेडकर नगर) के अधीन कार्य कर रहा था।उसके बाद क्षेत्रीय श्री गांधी आश्रम अकबरपुर का विभाजन वर्ष 1955/56 में हुआ।उसके बाद क्षेत्रीय श्री गांधी आश्रम मगहर वजूद में आया। 27 एकड़ में फैले गांधी आश्रम के मुख्य भवन का शिलान्यास वर्ष 1956 में किया गया।मगहर गांधी आश्रम के प्रथम मंत्री के रुप में रामनाथ चौबे ने कमान सम्भाली।अपनी ईमानदारी और वफादारी दिखाते हुए संस्था को उत्तरोतर विकास ओर ले गए। गांधी आश्रम में अंबरचरखा,साबुन,अगरबत्ती,रंगाई-छपाई आदि का कार्य तेजी से चल रहा था।जिसमें लगभ 250 कर्मचारी कार्यरत थे।इस दौरान आश्रम में खेस चादर,तौलिया का निर्माण कराया जाता था।ग्रामीण गांधी आश्रम से रूई को ले जाते थे और उसका चरखे से सूत तैयार कर के आश्रम में बेचते थे।जिससे उनमें स्वदेशी वस्तु के प्रति रूचि बनी रहती थी। क्षेत्रीय श्री गांधी आश्रम मगहर के दूसरे मंत्री के रूप में शिव कुमार पांडे ने कार्यभार लिया। उन्होंने भी गांधी आश्रम के विकास और कर्मचारी हित का कार्य किया इनके कार्यकाल में गांधी आश्रम वेद 250 कर्मचारी कार्यरत रहे।उस वक्त गांधी जयंती एवं 12फरवरी को आश्रम में चरखा दंगल का आयोजन किया जाता था।जिसके माध्यम से लोगों को स्वदेशी वस्तु को अपनाने के लिए जागरूक किया जा रहा है।इसके साथ ही सभी कर्मचारियों को समय-समय पर वेतन आदि का भुगतान किया जाता रहा। गांधी आश्रम मगहर शिपकी बटन,तेलघानी का कडुआ तेल निर्माण,अंबर चरखा, कुटीर एवं कबीर साबुन,अगरबत्ती बनती थी। अंबर चरखा पूरे प्रदेश में ही नहीं बल्कि देश के विभिन्न राज्यों में भी इसकी मांग थी।शिवकुमार पांडे की मृत्यु के पश्चात गाँधीआश्रम का समय भी धीरे-धीरे कमजोर होता गया। उनके बाद हीरा लाल श्रीवास्तव,कृष्ण प्यारे तिवारी,चंद्रिका पांडेय,जगदीश उपाध्याय,धर्मेंद्र उपाध्याय, सच्चिदानंद तिवारी,देवेन्द्र तिवारी,राम आशीष शर्मा मंत्री के रूप में कार्य किया गांधी आश्रम मगहर में मंत्री पद को लेकर आपसी खींचतान के कारण गांधी आश्रम स्थित बदहाल हो चुकी है।इस संस्था में जहां 250 कर्मचारी दिन रात एक कर के कार्य करते थे।जिसमें अधिकतर कर्मचारी सेवानिवृत हो चुके हैं। वर्तमान में मात्र 50 कर्मचारी ही कार्य कर रहे हैं जिसमें 16सेवानिवृत कर्मचारियों से भी कार्य लिया जा रहा है।उन्हें समय से वेतन आदि का भी भुगतान नहीं हो रहा है जिसके कारण कर्मचारी भुखमरी के कगार पर पहुंच चुके हैं।


इन्द्रेश,शिव शंकर यादव,रमेशचन्द्र मिश्रा आदि कर्मचारियों ने बताया कि कर्मचारियों की बदहाली के जिम्मेदार उच्च पदों पर बैठे लोग हैं।जिसके कारण उन्हें समय से वेतन आदि का भुगतान नहीं हो पा रहा है।वर्तमान में राम अशीष शर्मा के मंत्री रहते हुए दुसरे मंत्री के रुप में वीरेंद्र पाण्डेय को बैठा देना संस्था व कर्मचारियों के साथ धोखा किया जा रहा है। जिनके कारण आज आश्रम की दशा दिन प्रति दिन दयनीय होती जा रही है।इन्द्रेश ने बताया कि पैसे के अभाव में साबुन बनाने का कच्चा माल खराब हो रहा है।क्षेत्रीय श्री गांधी आश्रम मगहर के मंत्री वीरेंद्र पाण्डेय ने कहा कि उनका हमेशा प्रयास रहा है कि संस्था को दलदल से निकाला जाये।लेकिन कुछ कर्मचारी कार्य करने में रूचि नहीं लेते हैं।जिसके कारण कठिनाई उत्पन्न हो गई है।उन्होनें अभी तक सरकार से कोई सहायता नहीं मिल पाई है।जिसका कारण दो साल की बैलेंसीट का सम्मिट ना होना है।बैलेंसीट सम्मिट होने के साथ ही समस्या के समाधन होने की सम्भावना है।

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