मेरी कलम से: कसम से झूठ नहीं ….. मेरी कलम से: कसम से झूठ नहीं …..
सूर्यभान गुप्ता तंग नजर वालों से मुझको डर लगता है।दरवाजा नीचा हो तो सर ऊपर लगता है।इसको ही उम्मीद की टूटन कहते हैं।  शाम... मेरी कलम से: कसम से झूठ नहीं …..

सूर्यभान गुप्ता

तंग नजर वालों से मुझको डर लगता है।दरवाजा नीचा हो तो सर ऊपर लगता है।इसको ही उम्मीद की टूटन कहते हैं।  शाम ढलते ही किस्सों का बिस्तर लगता है ।प्रताप सोमवंशी के शेर से शुरू होता हूं। एक नए प्लेटफार्म पर।कसम से। अबकी बार कसम से झूठ नहीं लिखूंगा। कसम से आज तक अशर्फी वाली गली में अशर्फी नहीं मिली। सांसद वाली गली में सांसद नहीं मिले। लेकिन कचोरी वालीमें कचौड़ी मिली। 5 का 10 हो गया। पूछने पर बताया अरहर की दाल सो रुपया किलो। लेकिन इसमें तो उड़द  पड़ता है। दोनों बराबर होने जा रहे हैं। कसम से।चलिए मेरे भी अच्छे दिन आने वाले हैं। उम्मीद है कि जल्द ही बड़े पर्दे पर दिखाई पड़ सकता हूं। कथित झांसी की रानी का सहयोग रहा तो। कहीं चौकीदार के रूप में दिखाई पड़ सकता हूंl कसम से झूठ नहीं लिखूंगा। अबकी बार वादा किया है।किसानों के मामले में किसान आंदोलन कर रहे हैं। अंधभक्त जानते हुए भी मेज थपथपा रहे। कसम से। मेरे एक शुभचिंतक हैं ।कसम से। उन्होंने लिखा आपका आर्टिकल पढ़ता हूं। बगैर हेल्थ के पूरा नहीं करते। कसम से झूठ नहीं बोलूंगा।₹65 वाली ब्लड प्रेशर की दवा 90 हो गई। कसम से झूठ नहीं बोलूंगा। चलिए बहुत हो गया। गांजा अफीम चरस दारू। अब तो बताइए बिहारी लड़का कैसे मरा। चुनाव तक चर्चा जारी रहेगी।कसम से अब की बार झूठ नहीं लिखूंगा। आलू ₹35 हो गया।

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