बहुआयामी प्रतिभा के धनी थे पं. दीनदयाल उपाध्याय: प्रो. अजय प्रताप बहुआयामी प्रतिभा के धनी थे पं. दीनदयाल उपाध्याय: प्रो. अजय प्रताप
अयोध्या। डाॅ0 राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के कौटिल्य प्रशासनिक भवन में पं0 दीनदयाल उपाध्याय की जयंती पर आज प्रातः 11 बजे पं0 दीनदयाल उपाध्यायः... बहुआयामी प्रतिभा के धनी थे पं. दीनदयाल उपाध्याय: प्रो. अजय प्रताप

अयोध्या। डाॅ0 राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के कौटिल्य प्रशासनिक भवन में पं0 दीनदयाल उपाध्याय की जयंती पर आज प्रातः 11 बजे पं0 दीनदयाल उपाध्यायः कृतित्व व व्यक्तित्व विषय पर विचार गोष्ठी एवं माल्यार्पण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे विश्वविद्यालय मुख्य नियंता एवं कला संकायाध्यक्ष प्रो0 अजय प्रताप सिंह ने कहा कि पं0 दीनदयाल उपाध्याय बहुआयामी प्रतिभा के धनी थे उनके व्यक्तित्व में राष्ट्रवाद का अमिट छाप थी। उपाध्याय जी एक प्रभुत्व विचारक दार्शनिक लेखक एवं पत्रकार थे। प्रारम्भ से ही भारतीय संस्कृति के प्रचार.प्रसार के लिए समर्पित रहे। प्रो0 सिंह ने बताया कि भारतीय राष्ट्रवाद का आधार संस्कृति ही है। इसी संस्कृति में निष्ठा एवं एकात्मवाद जुड़ा है। पं0 दीनदयाल उपाध्याय ने ही जनसंघ की स्थापना की और समूचे देश को एक सूत्र में पिरोने का संकल्प लिया। उन्होंने कहा कि पं0 दीनदयाल का जन्म मथुरा के एक छोटे से गांव के साधारण परिवार में हुआ उनका सम्पूर्ण जीवन सादगी भरा रहा। पं0 दीनदयाल जी ने कई पुस्तकों का लेखन किया। उनका कहना था कि भारत में रहने वाला और उसके प्रति ममत्व की भावना रखने वाला एक जन है जहां से राष्ट्रवाद प्रारम्भ होता है।

कार्यक्रम के वक्ता एकात्मवाद मानव दर्शन प्रतिष्ठान उत्तर प्रदेश के सहसंयोजक रवि तिवारी ने पं0 दीनदयाल उपाध्याय के व्यक्तित्व एवं कृतित्व को स्मरण करते हुए कहा कि एकात्मवाद एक अद्भुत परिकल्पना है। पं0 दीनदयाल उपाध्याय जी की जयंती के 104 वर्ष पूरे होने पर उनके विचार आज भी उतने मौलिक एवं प्रासंगिक है। दीनदयाल जी राजनीतिक शुचिता के पक्षधर थे प्रत्येक व्यक्ति को उनके जीवन आदर्शों को अपनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि राजनीति संस्कृति का राजदूत है विचारहीन सिद्धांत समाज को भ्रमित करते है। राजनीति समाज के समग्र विकास के लिए होनी चाहिए।

  पं0 दीनदयाल उपाध्याय शोध.पीठ के समन्वयक प्रो0 आशुतोष सिन्हा ने बताया कि पं0 दीनदयाल उपाध्याय अद्भुत प्रतिभा के धनी थे। वे जीवन भर कई अभावों के बावजूद उन्होंने अपने जीवन सिद्धांतों को समझौता नही किया। पं0 दीनदयाल की गणना भारत माता के सच्चे सपूतो में की जाती है। एकात्मवाद जीवन की प्रत्येक समस्याओं का निदान कर सकता है। पं0 दीनदयाल जी सकारात्मक सोच सदैव भारतीय रही। वे राजनीति के उत्कृष्ट प्रतिमान भी रहे। वैचारिक असमानता के बावजूद डाॅ0 राममनोहर लोहिया के विचारों को सदैव सम्मान दिया। भारत की सभ्यता एवं संस्कृति अन्य देशों से अलग है इसे बचाये रखना आवश्यक है। कार्यक्रम को अवध प्रांत के संगठन मंत्री डाॅ0 कृपाशंकर पाण्डेय ने भी संबोधित किया।

 कार्यक्रम का शुभारम्भ पं0 दीनदयाल उपाध्याय एवं माॅ सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण करके किया गया। कार्यक्रम का संचालन प्रो0 आशुतोष सिन्हा ने किया। धन्यवाद ज्ञापन प्रो0 राजीव गौण द्वारा किया गया। इस अवसर पर विभाग सेवा प्रमुख दुर्गा प्रसाद त्रिपाठीए प्रो0 शैलेन्द्र कुमार डाॅ0 अनिल कुमार डाॅ0 डीएन वर्मा डाॅ0 विजयेन्दु चतुर्वेदी डाॅ0 मृदुला पाण्डेय डाॅ0 आरएन पाण्डेय इंजीनियर अनुराग सिंह इंजीनियर मनोज वर्मा इंजीनियर नवीन पटेल डाॅ0 दिलीप कुमार सिंह सागर सिंह नागेन्द्र यादव महेश सहित अन्य उपस्थित रहे।

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