मेरी कलम से : सूर्यभान गुप्त मेरी कलम से : सूर्यभान गुप्त
भूख: महंगाई: मौसम: से लड़ना नियति है। सरकार से  लड़ना: साजिश  और विद्रोह? प्रताप सोमवंशी के शेर से बात शुरूकरता हूं। आइए एक नए... मेरी कलम से : सूर्यभान गुप्त

भूख: महंगाई: मौसम: से लड़ना नियति है। सरकार से  लड़ना: साजिश  और विद्रोह? प्रताप सोमवंशी के शेर से बात शुरूकरता हूं। आइए एक नए प्लेटफार्म टाइम्स टुडे पर।जब कोई बड़ा पेड़ गिरता है तो थोड़ी धरती हिलती है। पिछले दिनों एक पेड़ गिरा अथवा गिराया गया। जो भी रहा हो। अचानक जीडीपी गिर गई। बेरोजगारी की संख्या बढ़ गई। गरीबी बढ़ गई। महंगाई बढ़ गई। चारों तरफ अंधकार छा गया। उधर धीरे-धीरे कथित झांसी की रानी का उदय हो रहा था। अथवा कराया जा रहा था। जो भी समझे। आप समझ ले कि झांसी की रानी के उदय के बाद  लोगों का# सामना #से सामना #होने लगा। कुछ लोगों का मानना है समस्याएं  हल हो गई । अंधभक्त झांसी की रानी के टूटे शीशे को लेकर चिंतित है। पूरा गोसाईगंज बाजार टूटने वाला है। अंधभक्त झांसी की रानी के चक्कर में पड़े हैं।चलिए कुछ आगे देखें। नौजवानों की समस्या।संविदा पर काम मिल जाने के बाद सुना है कि कुछ समय के बाद रिन्यूअल कराना पड़ता है। अच्छा होता सांसद विधायक मंत्री भी संविदा पर नियुक्त कर लिए जाते।फायदा होता। इलेक्शन का पैसा बच जाता। चलिए कुछ और देखते हैं। नशे के कारोबार को लेकर कक्कन परिवार की उत्तेजना समझ में नहीं आती। लड़ाई में बसंती भी आ गई। किशन लाल जी थाली का ख्याल कीजिए  थाली फिल्म इंडस्ट्री है। फिल्म इंडस्ट्री की गंदगी धीरे-धीरे बाहर आ रही है।बिहार में लॉकडाउन के समय बस का इंतजाम न करने वाले चुनाव के समय पैकेज दे रहे। आखरी बात  से अपनी बात समाप्त करता हूं ऑनलाइन  शिक्षा चल रही है। एक बच्चे को छत पर बैठे देखा। पूछा क्या कर रहे । अंकल ऑनलाइन पढ़ाई कर रहा हूं। नेटवर्क कोने में पकड़ता है। नेटवर्क के मामले में बता दें हिंदुस्तान 141 देशों में 128 नंबर पर है। बताना जरूरी है कि मेरा मतलब बच्चों को शिक्षा के नाम पर मुसीबत में नहीं डालना है ।

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