इसे गन्ना किसानों की मजबूरी कहे या चीनी मिल के जिम्मेदारों की हठधर्मिता इसे गन्ना किसानों की मजबूरी कहे या चीनी मिल के जिम्मेदारों की हठधर्मिता
डॉ ए एस विशेन /प्रेम प्रकाश कुशीनगर इसे गन्ना किसानों की मजबूरी कहे या चीनी मिल के जिम्मेदारों की हठधर्मिता की एक ही प्रजाति... इसे गन्ना किसानों की मजबूरी कहे या चीनी मिल के जिम्मेदारों की हठधर्मिता

डॉ ए एस विशेन /प्रेम प्रकाश

कुशीनगर इसे गन्ना किसानों की मजबूरी कहे या चीनी मिल के जिम्मेदारों की हठधर्मिता की एक ही प्रजाति का गन्ना क्षेत्र में लंबे समय से बोये जाने के वजह से उसमे लगा रोग व असमय वर्षा के वजह से किसानों के खेतों में खड़ा गन्ना सुख रहा है। जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई है। क्षेत्र के किसानों का ज्यादा तर गन्ना रामकोला स्थित त्रिवेदी चीनी मिल को जाता है। मिल के जिम्मेदारों ने चीनी परता बढ़ाने के चक्कर में कृषि बैज्ञानिकों व गन्ना विशेषज्ञों के सलाह को नजरअंदाज करते हुए। अर्ली वेरायटी का गन्ना को -0238की अधिकांश क्षेत्र फल में बुआई करा दी लम्बे समय से  इसके सापेक्ष कोई उपयुक्त किस्म की गन्ने की प्रजाति न मिलने के सूरत में किसानों ने लगातार इसी प्रजाति की बुआई की जिस वजह से यह प्रजाति रेड रॉट या लाल सड़न सहित अन्य कई विमारियों से ग्रसित हो गई। इस वर्ष असमय व अत्यधिक वर्ष के वजह से रोग ग्रस्त इस प्रजाति का गन्ना खेतो में खड़े खड़े सुख रहा है। इस सम्बंध में जिला गन्ना अधिकारी बेदप्रकाश सिंह ने बताया कि जानकारी मिल रही है। बचाव ही उचार है।फसल चक्र अपनाने के साथ ही। किसान पानी लगे खेतो से पानी निकाल दें रेड रॉट लगे खेतो में हेक्सटॉप दवा का छिड़काव करें। सूखे गन्ने को उखाड़ कर जला दे या मिट्टी में दबा दें।

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