अज्ञान के अंधकार से ज्ञान के प्रकाश की ओर जाना ही शिक्षा का उद्देश्य: धोत्रे अज्ञान के अंधकार से ज्ञान के प्रकाश की ओर जाना ही शिक्षा का उद्देश्य: धोत्रे
अयोध्या। डाॅ0 राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय एवं स्टूडेंटस फाॅर होलिस्टिक डेवलपमेंट इन ह्यूमैनिटी के संयुक्त संयोजन में आज  नई शिक्षा नीतिः सम्भावनाएं और चुनौतियां विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय वेबिनार का समापन हुआ। समापन सत्र को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि भारत सरकार के शिक्षा राज्यमंत्री संजय धोत्रे ने कहा कि स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता का स्तर ठीक करना वर्तमान परिवेश की आवश्यकता है। शिक्षा का मूल्य उद्देश्य अज्ञान के अंधकार से ज्ञान के प्रकाश की ओर जाना होता है। शिक्षा एक ऐसा विषय है जिससे भारत प्रत्येक परिवार प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जुड़ा हुआ है। उन्होंने बताया कि देश के प्रधानमंत्री एवं मानव संसाधन मंत्री के नेतृत्व में आज भारत को नई शिक्षा नीति मिली है। भारतीय शिक्षा व्यवस्था में बदलाव की शुरूआत इस नीति से हुई है। समापन की अध्यक्षता करते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो0 रविशंकर सिंह ने कहा कि नई शिक्षा नीति राष्ट्रीय महत्व का एक महत्वपूर्ण विषय है। नई शिक्षा नीति को लेकर केन्द्र सरकार और शिक्षाविदों ने काफी मंथन के बाद यह नीति तैयार की है। समापन सत्र के पूर्व तकनीकी सत्र का आयोजल किया गया। तकनीकी सत्र को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 ड्राफ्टिंग कमेटी के सदस्य अनुराग बेहर ने कहा कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति की अन्तर्निहित भावना को समझना होगा इसमें एकीकरण को सर्वाधिक महत्ता दी गई है।  प्रो0 बलराज चैहान, कुलपति धर्मशास्त्र राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, जबलपुर ने कहा कि नई शिक्षा नीति निश्चित रूप से भारत के भविष्य के निर्माण में प्रत्यक्ष रूप से सहायक होगी। प्रो0 लक्ष्मन सिंह राठौर, पूर्व निदेशक भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने कहा कि नीतियां तो बनती रहती है लेकिन उनका क्रियान्वयन किस प्रकार हो यह आवश्यक है।  मदन मोहन मालवीय तकनीकी विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो0 एसएन सिंह ने कहा कि पिछली लगभग सभी शिक्षा नीतियों में परीक्षा प्रणाली थोड़ी भ्रामक रही है। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नई दिल्ली के डाॅ0 अंशु जोशी ने कहा कि पिछले 34 वर्षों से जो भारतीय शिक्षा प्रणाली चली आ रही थीउसमें आमूलचूल परिवर्तन करते हुए नई शिक्षा नीति हमारे सामने है।  लखनऊ विश्वविद्यालय के राजनीति विज्ञान के प्रो0 आर0के0 मिश्र ने कहा कि इस शिक्षा नीति में किये गये परिवर्तन अत्यन्त उत्साहजनक है।  राष्ट्रीय शिक्षा नीति, एमएचआरडी के सलाहकार डाॅ0 रामानन्दन पाण्डेय ने कहा कि कोई नीति कितनी जन हित में हो उसका निर्धारण इस बात से किया जा सकता है कि समाज स्वयं को उस नीति से जोड़ने में कितना सक्षम है वेबिनार के संयोजक प्रो0 एसएन शुक्ल ने बताया कि इस दो दिवसीय वेबिनार में नई शिक्षा नीति पर शिक्षाविद्वों का जमावड़ा रहा है। इसमें नई शिक्षा नीति पर विद्वानों ने संभावनाओं और चुनौतियों पर मंथन हुआ।  कार्यक्रम का संचालन करते हुए आयोजन सचिव डाॅ0 गीतिका श्रीवास्तव ने कार्यक्रम की रिपोर्टियर प्रस्तुत की। धन्यवाद ज्ञापन सहसंयोजक प्रो0 रमापति मिश्र द्वारा किया गया। तकनीकी सहयोग इंजीनियर मनीषा यादव, इंजीनियर पारितोष त्रिपाठी, इंजीनियर राजीव कुमार, इंजीनियर रमेश मिश्र ने प्रदान किया। इस अवसर पर कुलसचिव उमानाथ, डाॅ0 प्रदीप खरे, डाॅ0 त्रिवेणी सिंह, प्रो0 फारूख जमाल सहित बड़ी संख्या में प्रतिभागी आनलाइन जुड़े रहे। अज्ञान के अंधकार से ज्ञान के प्रकाश की ओर जाना ही शिक्षा का उद्देश्य: धोत्रे

अयोध्या। डाॅ0 राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय एवं स्टूडेंटस फाॅर होलिस्टिक डेवलपमेंट इन ह्यूमैनिटी के संयुक्त संयोजन में आज  नई शिक्षा नीतिः सम्भावनाएं और चुनौतियां विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय वेबिनार का समापन हुआ। समापन सत्र को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि भारत सरकार के शिक्षा राज्यमंत्री संजय धोत्रे ने कहा कि स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता का स्तर ठीक करना वर्तमान परिवेश की आवश्यकता है। शिक्षा का मूल्य उद्देश्य अज्ञान के अंधकार से ज्ञान के प्रकाश की ओर जाना होता है। शिक्षा एक ऐसा विषय है जिससे भारत प्रत्येक परिवार प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जुड़ा हुआ है। उन्होंने बताया कि देश के प्रधानमंत्री एवं मानव संसाधन मंत्री के नेतृत्व में आज भारत को नई शिक्षा नीति मिली है। भारतीय शिक्षा व्यवस्था में बदलाव की शुरूआत इस नीति से हुई है। समापन की अध्यक्षता करते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो0 रविशंकर सिंह ने कहा कि नई शिक्षा नीति राष्ट्रीय महत्व का एक महत्वपूर्ण विषय है। नई शिक्षा नीति को लेकर केन्द्र सरकार और शिक्षाविदों ने काफी मंथन के बाद यह नीति तैयार की है। समापन सत्र के पूर्व तकनीकी सत्र का आयोजल किया गया। तकनीकी सत्र को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 ड्राफ्टिंग कमेटी के सदस्य अनुराग बेहर ने कहा कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति की अन्तर्निहित भावना को समझना होगा इसमें एकीकरण को सर्वाधिक महत्ता दी गई है।  प्रो0 बलराज चैहान, कुलपति धर्मशास्त्र राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, जबलपुर ने कहा कि नई शिक्षा नीति निश्चित रूप से भारत के भविष्य के निर्माण में प्रत्यक्ष रूप से सहायक होगी। प्रो0 लक्ष्मन सिंह राठौर, पूर्व निदेशक भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने कहा कि नीतियां तो बनती रहती है लेकिन उनका क्रियान्वयन किस प्रकार हो यह आवश्यक है।  मदन मोहन मालवीय तकनीकी विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो0 एसएन सिंह ने कहा कि पिछली लगभग सभी शिक्षा नीतियों में परीक्षा प्रणाली थोड़ी भ्रामक रही है। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नई दिल्ली के डाॅ0 अंशु जोशी ने कहा कि पिछले 34 वर्षों से जो भारतीय शिक्षा प्रणाली चली आ रही थीउसमें आमूलचूल परिवर्तन करते हुए नई शिक्षा नीति हमारे सामने है।  लखनऊ विश्वविद्यालय के राजनीति विज्ञान के प्रो0 आर0के0 मिश्र ने कहा कि इस शिक्षा नीति में किये गये परिवर्तन अत्यन्त उत्साहजनक है।  राष्ट्रीय शिक्षा नीति, एमएचआरडी के सलाहकार डाॅ0 रामानन्दन पाण्डेय ने कहा कि कोई नीति कितनी जन हित में हो उसका निर्धारण इस बात से किया जा सकता है कि समाज स्वयं को उस नीति से जोड़ने में कितना सक्षम है वेबिनार के संयोजक प्रो0 एसएन शुक्ल ने बताया कि इस दो दिवसीय वेबिनार में नई शिक्षा नीति पर शिक्षाविद्वों का जमावड़ा रहा है। इसमें नई शिक्षा नीति पर विद्वानों ने संभावनाओं और चुनौतियों पर मंथन हुआ।  कार्यक्रम का संचालन करते हुए आयोजन सचिव डाॅ0 गीतिका श्रीवास्तव ने कार्यक्रम की रिपोर्टियर प्रस्तुत की। धन्यवाद ज्ञापन सहसंयोजक प्रो0 रमापति मिश्र द्वारा किया गया। तकनीकी सहयोग इंजीनियर मनीषा यादव, इंजीनियर पारितोष त्रिपाठी, इंजीनियर राजीव कुमार, इंजीनियर रमेश मिश्र ने प्रदान किया। इस अवसर पर कुलसचिव उमानाथ, डाॅ0 प्रदीप खरे, डाॅ0 त्रिवेणी सिंह, प्रो0 फारूख जमाल सहित बड़ी संख्या में प्रतिभागी आनलाइन जुड़े रहे।

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