…..इसीलिए आंखों में गड़े हैं …..इसीलिए आंखों में गड़े हैं
सूर्यभान गुप्ता जहां पर सच है। वहीं पर खड़े हैं। और इसीलिए आंखों में गड़े हैं। प्रताप सोमवंशी के शेर से शुरू करता हूं।... …..इसीलिए आंखों में गड़े हैं


सूर्यभान गुप्ता

जहां पर सच है। वहीं पर खड़े हैं। और इसीलिए आंखों में गड़े हैं। प्रताप सोमवंशी के शेर से शुरू करता हूं। एक नए प्लेटफार्म  times today पर। संपादक जी को बधाई देते हुए शुरू होता  हूं। हमारे यहां एक सेठ जी थे। वर्तमान सरकार की तरह दूरदर्शी। आज के समय के हिसाब से आधा करोड़ की संपत्ति सरकारी विभाग को लीज पर दे दिया। दूरदर्शन पर सुन रहा था। मंत्री जी कह रहे थे 50 साल के लिए दिया जा रहा है। 50 साल बाद वापस आ जाएगा। शायद एयर इंडिया की बात है। देहात में कहावत है लेता म रै की देता। बहरहाल इधर बात चल रही है  नीट तथा अन्यपरीक्षाओं के बारे में। छात्रों का एक बड़ा तबका कोरोना काल में परीक्षा कराने को उचित नहीं मान रहा है। फिलहाल सरकार डटी हुई है। चलिए परीक्षा केंद्र भी बन गए। परीक्षा भी हो जाएगी। कोरोना काल में बहुत कुछ बर्बाद हुआ। आगे दुआ कीजिए। फिलहाल चलते चलते एक सवाल करोड़ों रुपए का छोड़ जाता हूं। सुशांत सिंह लटके या लटकाए गए। वैसे टीवी वाले तलाश रहे।

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