भवते श्रीकृष्ण जन्मोत्सवम शुभम च मंगलमयी भवेत। भवते श्रीकृष्ण जन्मोत्सवम शुभम च मंगलमयी भवेत।
एहि मुरारे कुंजबिहारे एहि प्रणतजनबन्धो।हे माधव!मधुबदनवरेण्यो केशव करुणासिन्धो।।रासनिकुंजे गुंजति नियतं भ्रमर शतं किल कांत।त्वामिह याचे दर्शन दानम हे मधुसूदन शांत।।एहि निभृत पथ पांथ।।शुन्यम कुसुमासन्मिह... भवते श्रीकृष्ण जन्मोत्सवम शुभम च मंगलमयी भवेत।

एहि मुरारे कुंजबिहारे एहि प्रणतजनबन्धो।
हे माधव!मधुबदनवरेण्यो केशव करुणासिन्धो।।
रासनिकुंजे गुंजति नियतं भ्रमर शतं किल कांत।
त्वामिह याचे दर्शन दानम हे मधुसूदन शांत।।
एहि निभृत पथ पांथ।।
शुन्यम कुसुमासन्मिह शून्यम शून्यम केलिक दम्भ:
दीन:केलिक दम्भ:
मृदुकल नादम किल स विषादम रोदति यमुना स्वम्भ:
नव नीरजधर श्यामल सुंदर चन्द्र कुसुम रुचिवेश,गोपी गण हृदयेश।।

परमब्रह्म परमात्मा श्रीकृष्ण जी महाराज के प्राकट्य दिवस भाद्रपद बदी अष्टमी के महोत्सव के अवसर पर समस्त चर, अचर,खेचर,भूचर,जलचर सहित चराचर सृष्टि में विद्यमान अंडज पिंडज व अन्यान्य विधाता की कृतियों को माध्यमिक शिक्षक संघ,अम्बेडकर नगर की कोटि कोटि शुभकामनाएं
सादर जय श्री कृष्ण
जय श्री राधे
भवते श्रीकृष्ण जन्मोत्सवम शुभम च मंगलमयी भवेत।
सर्वेभ्यो नमः।
-उदयराज मिश्र
अध्यक्ष,माध्यमिक शिक्षक संघ
एवम समस्त पदाधिकारी/सदस्य कार्यकारिणी
जंप-अम्बेडकर नगर

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