माताओं ने कुश की पूजा कर पुत्रों के दीर्घायु होने की कामना कीं माताओं ने कुश की पूजा कर पुत्रों के दीर्घायु होने की कामना कीं
सत्य प्रकाश वर्मासंत कबीर नगर।हिन्दू धर्म के अनुसार हिन्दी के प्रत्येक महीने का अलग अलग महत्व है।जिसमे भादों महीने का बड़ा महत्व माना गया... माताओं ने कुश की पूजा कर पुत्रों के दीर्घायु होने की कामना कीं

सत्य प्रकाश वर्मा
संत कबीर नगर।हिन्दू धर्म के अनुसार हिन्दी के प्रत्येक महीने का अलग अलग महत्व है।जिसमे भादों महीने का बड़ा महत्व माना गया है ।इसी माह के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को मातायें हलछ्ट्ठ के रूप में मनाती हैं।इस दिन व्रत रख कर कुश की श्रद्धा भाव से पूजा करती हैं और पुत्रों के दीर्घायु होने की मंगल कामना करती हैं।
जनपद में हलछ्ट्ठ (तिनछ्ट्ठी) के अवसर पर रविवार को महिलाओं ने व्रत रखा।व्रत के दौरान महिलाएं महुआ की दातून करती हैं।उसके बाद महुआ,दही,तिन्नी का चावल के साथ ही अन्य पूजन सामग्री के समय महारानी माता मंदिर पर पहुंच कर वहां कुश की विधि विधान से पूजा करती हैं।व्रती मातायें कुश पूजन करने के बाद मंदिर के सामने हलछ्ट्ठ व माता गौरी पार्वती तथा शिव की कथा कहानी सुनने के पश्चात पुत्रों के दीर्घायु होने की मंगल कामना करती हैं।उसके बाद अपने घरों को वापस आती हैं।व्रती महिलाओं ने बताया कि इस व्रत में बिना जोताई के पैदा हुई वस्तुओं का सेवन किया जाता है।जिसमें शाम के समय केर्मुआं का साग,तिन्नी का चावल,भैंस के दूध से बनी दही,हरा मिर्चा आदि का भोजन में प्रयोग किया जाता है।इस दौरान मगहर कस्बे के प्राचीन पंचवटी शिव मंदिर,काली मंदिर, समरधीर बाबा,मोहनलालपुर काली मंदिर पर भी व्रती माताओं ने विधि विधान से पूजा अर्चना किया।

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