–:जीवन के सहचर :– –:जीवन के सहचर :–
जीवन के पथ परकभीधूप, कभी छांव भी मिलेगा। कभी शीतल फुहार होगी, कभी ताप भी गिरेगा। आंधी कभी चलेगी, कभी शीतल प्रवाह होगा। कभी... –:जीवन के सहचर :–

जीवन के पथ परकभीधूप, कभी छांव भी मिलेगा।

कभी शीतल फुहार होगी, कभी ताप भी गिरेगा।

आंधी कभी चलेगी, कभी शीतल प्रवाह होगा।

कभी प्यार की होगी बरसा, कभी टकराव साथ होगा।

कभी रिश्ते नये बनेंगे, कभी बिखराव भी तो होगा।

कहीं मित्र साथ होंगे, कहीं शत्रु भाव होगा।

कहीं मान तेरा होगा, तो अप मान भी मिलेगा।

कभी अपने पराए होंगे, तो अपनत्व भी मिलेगा।

सम्मुख मिलेगा स्वागत, पीछे बुराई होगी।

आत्मीयता मिलेगी, तो दुख भी साथ होगा।

प्रसन्नता के साथ में, खिन्नता भी तो होगी।

सद्भावना के संग में, दुर्भाव भी तो होगा।

हे पथिक चला चल, तू अपने कर्म पथ पर।

हिय भाव शुद्ध रख तू, बढ़ जा कर्तव्य पथ पर।

जीवन के ये है सहचर, तू दे न ध्यान इन पर।

मंजिल तुझे मिलेगी, विश्वास रख प्रभु पर।

मेजर (डॉ. )बलराम त्रिपाठी

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