जितेंद्रानंद सरस्वती होंगे भूमि पूजन में विशिष्ट अतिथि जितेंद्रानंद सरस्वती होंगे भूमि पूजन में विशिष्ट अतिथि
डॉ ए एस विशेन/ प्रेम प्रकाश कुशीनगर 30 जुलाई 2020। भगवान बुद्ध की तपोस्थली कुशीनगर यूं ही नहीं विश्व में अपनी पताका फहरा रही... जितेंद्रानंद सरस्वती होंगे भूमि पूजन में विशिष्ट अतिथि

डॉ ए एस विशेन/ प्रेम प्रकाश

कुशीनगर 30 जुलाई 2020। भगवान बुद्ध की तपोस्थली कुशीनगर यूं ही नहीं विश्व में अपनी पताका फहरा रही है ।इस धरती पर कई ऐसे विद्वान महापुरुष हुए जिन्होंने अपनी विद्वता का लोहा विश्व में मनवाया। इसी जिले की माटी में जन्मे पढ़े-लिखे विद्वान जितेंद्र पाठक जो अब जितेंद्रानंद सरस्वती के नाम से प्रसिद्ध हैं वह भी इस शिलान्यास भूमि पूजन कार्यक्रम में तमाम विद्वानों के बीच मौजूद रहेंगे ।खबरों के मुताबिक जितेंद्रानंद सरस्वती को भी राम मंदिर का भूमि पूजन  कराने के लिए विशिष्ट अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया है। अब हम आपको अवगत कराने जा रहे हैं कि यह विशिष्ट अतिथि और जाने-माने विद्वान कौन हैं।प्रदेश के अति पिछड़े जिले कुशीनगर के अंतिम छोर पर स्थित खड्डा तहसील क्षेत्र के ग्राम रामपुर गोनहा में एक मध्यम वर्गीय परिवार में जन्मे जितेंद्र पाठक वे मर्मज्ञ है जो अपनी योग्यता कर्मठता समाजसेवी स्वभाव के बल पर आज जितेंद्रानंद सरस्वती के नाम से विख्यात है। जितेन्द्रानंद सरस्वती की प्रारंभिक शिक्षा खड्डा के भारतीय शिशु मंदिर में हुई। स्नातक की शिक्षा उन्होंने उदित नारायण इंटर कॉलेज पडरौना से प्राप्त कर संघ के प्रचारक बन गए ।

अपने प्रचारक दौर में उन्होंने बनारस और सोनभद्र जिले का बागडोर संभाला। गांव-गांव गली-गली घर घर लोगों के अंदर हिंदुत्व की भावना जागृत की। मदन मोहन मालवीय  के पौत्र व सुप्रीम कोर्ट के जज गिरधर मालवीय के संपर्क में आने के बाद जितेंद्रानंद सरस्वती गंगा महासभा के राष्ट्रीय महामंत्री हो गए ।अविरल मोक्षदायिनी गंगा को स्वच्छ सुंदर बनाने के लिए उन्होंने गंगा स्वच्छता आंदोलन का बिगुल बजा दिया ।निरंतर एक के बाद एक कार्यक्रमों के माध्यम से  सोए हुए सरकार को जागृत कर गंगा को स्वच्छ बनाने के लिए निरंतर प्रयास करते रहे। जब संगम तट पर इलाहाबाद में एक कॉलोनी के निर्माण के दौरान गंगा को  प्रदूषित करने की संभावना पर उन्होंने इलाहाबाद हाई कोर्ट में याचिका दाखिल कर निर्माण कार्य रोके जाने की याचिका दायर की। जिसका अधिवक्ता संघ इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सहृदय स्वागत किया। न्यायालय ने आदेश जारी कर कॉलोनी के निर्माण पर रोक लगा दिया। तत्पश्चात डंडा स्वामी ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य वासुदेवानंद सरस्वती के संपर्क में आकर ज्ञान अर्जित कर उनके शिष्य बन गए और डंडा स्वामी हो गए। अभी उनका सफर यहीं नहीं थमा कुछ कर दिखाने की प्रतिभा मन में सजाएं जितेंद्रानंद सरस्वती ने अखिल भारतीय संत समिति के राष्ट्रीय महामंत्री बनकर दुनिया का मार्गदर्शन  किया और संतों को सहेजने के साथ-साथ भारतीय संस्कृति को जीवंत करने के लिए अपने यात्रा को अनवरत जारी रखते हुए विलुप्त हो चली सभ्यता परंपरा को जीवंत करने के लिए दिन रात एक कर दिया। इनके प्रतिभा और समर्पण के देखते हुए विश्व हिंदू परिषद के उच्च अधिकारी समिति का  सदस्य बनाया गया। जितेंद्रानंद सरस्वती राम मंदिर आंदोलन के अग्रिम कतार के समाजसेवियों में अपना नाम दर्ज कराते हुए दिसंबर 2018 में धर्म आदेश रैली के संयोजक रहे। जिसमें देश के सभी प्रमुख संतो को साथ लेकर इस कार्यक्रम का संचालन करते हुए कार्यक्रम को सफल बनाया। 1990 में शिला पूजन के दौरान राम जन्मभूमि आंदोलन के समय इन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।एक दिन देवरिया जेल में रहने के उपरांत इन्हें उनके साथियों के साथ 1 माह 14 दिन के लिए बस्ती जेल भेज दिया गया। इनके साथ स्थानीय लोगों में निवर्तमान नगर पंचायत अध्यक्ष दीप लाल भारती, रामविलास गुप्ता, राधे मद्धेशिया,विजय पांडेय (भुजौली), राम प्रसाद सिंह (सिरसिया), मिठाई बाबा (खड्डा), विश्व बंधु सिंह (मदनपुर),शारदा यादव (भैसहा) व डॉक्टर सुनील सरकार( खड्डा )आदि का नाम प्रमुखता से अंकित है। आज पूरे देश में अखिल भारतीय संत समिति के प्रतिनिधि स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती के शिष्य जितेंद्रानंद सरस्वती का नाम जब राम जन्म भूमि मंदिर के शिलान्यास के विशिष्ट अतिथियों की सूची में अंकित पाया तो खड्डा के लोगों फूले नहीं समाए । अपने  धरती पर जन्मे  इन विद्वानों को उच्च स्थान पर पहुंचता देख खड्डा के निवासी धन्य महसूस करने लगे है। स्वामी जितेन्द्रानंद सरस्वती के  जीवनी पर प्रकाश डालते हुए पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष और भाजपा के वरिष्ठ नेता डॉ निलेश कुमार मिश्र ने बताया कि जितेन्द्रा नंद सरस्वती बाल काल से ही सहयोगी स्वभाव के व्यक्ति थे।संतो के  सानिध्य में बचपन से ही रहा करते थे। वह धर्म प्रचार, भारतीय संस्कृति को जीवंत रखने के अथक प्रयास करते रहते थे। विद्यालयों में नाटय कार्यक्रम के दौरान धार्मिक नाटकों में बढ़ चढ़कर हिस्सा भी लेते थे। आज जब प्रमुख संतों के साथ राम जन्मभूमि आंदोलन में उनका नाम सुनने में आया है तो मन में जिज्ञासा और सम्मान और बढ़ गया है।

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