सिरदर्द बन गई है डग्गेमारी सिरदर्द बन गई है डग्गेमारी
राजेश तिवारी अंबेडकर नगरसड़कों पर डग्गामार वाहनों की भरमार है। नियमों की धज्जियां उड़ाकर ऐसे वाहन थाने और पुलिस चौकियों के सामने से फर्राटे... सिरदर्द बन गई है डग्गेमारी

राजेश तिवारी

अंबेडकर नगर
सड़कों पर डग्गामार वाहनों की भरमार है। नियमों की धज्जियां उड़ाकर ऐसे वाहन थाने और पुलिस चौकियों के सामने से फर्राटे भरते हुए निकल जाते हैं, लेकिन पुलिस को इन वाहनों पर कार्रवाई करने की उस समय याद आती है, जब कोई बड़ा हादसा हो जाए। बीते कुछ दिनों में इन वाहनों के अनियंत्रित होकर पलटने से कई हादसे हो चुके हैैं।
इन वाहनों में सफर करना खतरे से खाली नहीं है। क्योंकि 10 से 12 सीटर पास इन ​वाहनों में 18 से 22 सवारियां भरी जाती है। ये कैसे संभव हो सकता है तो फोटो देखकर आप इसका अंदाजा लगा सकते हैं। इतनी सवारियों को जीप, टाटा मैजिक, मैक्स में भूसे की तरह अंदर भरने के बाद छतों पर बैठाकर, वाहन के पीछे और साइडों से लटका कर सफर कराया जाता है।
पुलिस की मिलीभगत से ऐसे वाहन सड़कों पर फर्राटे भर रहे हैं। प्रति चक्कर 50 रुपये में 20 से 22 लोगों की जिंदगियों को पुलिस दांव पर लगा देती है। पुलिस कहती यह है कि इन वाहनों के मामले में सख्ती से निपटा जाता है, लेकिन ये सख्ती एक या दो दिन की होती है। इसके बाद रवैया पु​राना हो जाता है।

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