डॉ ए एस विशेन/प्रेम प्रकाश नारायणी नदी में पानी के बढ़ते दबाव को देख एपी बंधे के किनारे जीवन यापन कर रहे लोगों में...

डॉ ए एस विशेन/प्रेम प्रकाश

नारायणी नदी में पानी के बढ़ते दबाव को देख एपी बंधे के किनारे जीवन यापन कर रहे लोगों में भय का माहौल है। नदी में इस वर्ष सबसे अधिक 4 लाख 36 हजार 500 कियूसेक जल प्रवाह जारी है। इस धारा में प्रत्येक दिन नोज और स्पर का पानी में विलीन हो जाना आम बात है।
जानकारों की मानें तो वर्ष 2012 में सबसे अधिक 6लाख 33हजार क्यूसेक तक का धारा प्रवाह बंधा झेल चुका है। पर वो बात जुदा थी। पिछले आठ वर्षों में आधा दर्जन से अधिक गांव काल के गाल में समा गये हैं। प्रत्येक वर्ष करोड़ों के लागत से किये गये बचाव कार्य डीह टोला, कचहरी टोला, खैरखूटा, जैसे गांव को नहीं बचा सके। हां इस बीच बंधे पर ठिकेदारी करा रहे ठिकेदारों का कद जरूर ऊंचा हुआ है। नदी में 4 लाख 36 हजार 500 कियूसेक पानी के वृद्धि से धारा बंधे से टकरा कर बह रही है। जिससे बंधे के कई पॉइंटों पर दबाव बढ़ गया है। परियोजना के तहत इस वर्ष विभाग ने बंधे के किमी 12.900 पर स्पर का निर्माण शुरू किया था पर धारा प्रवाह ने कार्यों कि गुणवत्ता की पोल खोल कर रख दिया नोज का अप्रन देखते ही देखते नदी में बिलीन हो गयी है। इसके अलावे 1.480 के स्पर पर भी नदी कुदृष्टी बनी हुई है‌14.55 किमी पर बने नोज के ऊपर ओवर फ्लो जारी है। और बंधा बैकरोलिग के जद में हैं। डीह टोला निवासी जनक यादव, जवाहिर यादव,सुभाष,रमायन,चनरदेव, सुरेश ने बताया नदी का बंधा भले ही प्रवाह को झेल ले पर जल स्तर के नीचे उतरते ही कटान का संकट हमारे घरों के अलावा कयी जगहों से देखने को मिल सकता है। क्योंकि पानी सीधे बंधे पर दबाव बना रही है।और पानी के दिशा परिवर्तन के लिए बनाए गये सभी उपक्रम दिन पर दिन नदी के धारा में विलीन होते जा रहे हैं। हालांकि उपजिलाकारी तमकुहीराज ए आर फारूकी ने एपी बंधे के सभी संवेदनशील पॉइंटों का दौरा कर फिलहाल स्थति को काबू में बताया है। जबकि सहायक अभियन्ता श्रवण कुमार प्रियदर्शी ने कहा कि डिस्चार्ज बढ़ रहा है बंधे पर कोई खतरा नही है। पर हाईकमान से मिल रहे दिशानिर्देश और अधिकारियों के दिनपर दिन बढ़ती चहलकदमी स्थानीय जनता के माथे पर बल देने के लिए प्रर्याप्त है।

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