जो क़यामत आती है .. जो क़यामत आती है ..
हरि कांत त्रिपाठी रिटायर्ड आईएएस दिल के वीराने में भी आवाज़ इक आती तो हैशमा छोटी ही सही अंधड़ से टकराती तो है ओढ़... जो क़यामत आती है ..

हरि कांत त्रिपाठी

रिटायर्ड आईएएस

दिल के वीराने में भी आवाज़ इक आती तो है
शमा छोटी ही सही अंधड़ से टकराती तो है

ओढ़ कर ख़ामोशियाँ ताबूत में जो सो रहे
उनके मुर्दा जिस्म में जुम्बिश नज़र आती तो है

छोड़ शिकवे ग़ैरों से अब पाँव मंज़िल को चले
धीमे चलने की धमक पर पास तक आती तो है

धूप में देखा कली इक मुस्करा कर कह रही
झिर्रियों से ज़िन्दगी की रौशनी आती तो है

यह सुनामी चल के आयी है , चली ही जायेगी
रोज़ वैसे भी लहर साहिल से टकराती तो है

छोड़कर जो जा चुके उनके लिए अपना सलाम
लड़ रहे जो आँख उनको देख भर आती तो है

‘कान्त’ हिम्मत हौसला क़ायम रहे , तू सब्र कर
जो क़यामत आती है आख़िर चली जाती तो है

Times Todays News

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