शाश्वत सत्य शाश्वत सत्य
डॉ बलराम त्रिपाठी कितने घट टूटे होंगे, गिनना उनको शक्य नहीं।   पनघट खड़ा हो मुस्काता, मैं बदला बिल्कुल अभी नहीं।   घट बने सब मिट्टी के,... शाश्वत सत्य

डॉ बलराम त्रिपाठी
 कितने घट टूटे होंगे, गिनना उनको शक्य नहीं।  

पनघट खड़ा हो मुस्काता, मैं बदला बिल्कुल अभी नहीं। 

 घट बने सब मिट्टी के, दिखने में सब अलग दिखे। 

 जल है सब में एक तरह के, गुण धर्म ना अलग दिखे। 

 घट टूटेगा मिट्टी होगा, जल जाकर जल में ही मिले।

  टूटने मिलने का खेल सभी, समझ सके तो शांति मिले। 
   

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