लेकिन बाद में सब भूल जाते हैं। लेकिन बाद में सब भूल जाते हैं।
डॉ ए एस विशेन/प्रेम प्रकाश बारिश के दिनों में यूं तो गंडक नदी उफान पर होती है हर साल तबाही मचाना, जैसे उसका सबब... लेकिन बाद में सब भूल जाते हैं।

डॉ ए एस विशेन/प्रेम प्रकाश

बारिश के दिनों में यूं तो गंडक नदी उफान पर होती है हर साल तबाही मचाना, जैसे उसका सबब बन गया हो। सैकड़ों लोगों को अपना घर छोड़ कर बांधों पर रहने के लिए मजबूर हो जाते हैं। जनप्रतिनिधि आते हैं, अधिकारी दौड़ा करते हैं, और पुनर्वास की बात करते हैं। लेकिन बाद में सब भूल जाते हैं।
बात करें तमकुही राज तहसील के अमवा खास अहिरौली दान तक लगभग 17 किलोमीटर लंबी एपी बांध की,जो हर साल बनती है और सैकड़ों ग्रामीणों को हर साल बांधो पर शरण लेने के लिए मजबूर कर देती है। सिंचाई विभाग के द्वारा हर साल बांधो की मरम्मत तथा निरीक्षण कार्यों के लिए लाखों रुपए खर्च किया जाता है। लेकिन खतरा टलते ही बैताल फिर उसी डाल पर जा बैठता है। और कटान समाप्त होने के बाद ग्रामीणों के खेत, फसल और घर नदियों में विलीन हो जाते हैं। जिनकी आर्थिक स्थिति सही होती है,वह ऊंचाइयों पर जाकर अलग जगह पर अपना आशियाना बना लेते हैं,और जिनकी आर्थिक स्थिति कमजोर होती है वहीं बांधों पर पॉलिथीन में शरण लेने को मजबूर रहते हैं।इस समय नेताओं द्वारा ग्रामीणों के पुनर्वास की बात तो की जाती है लेकिन सब समय के साथ भूल जाता है । लेकिन पानी समाप्त होते ही नेताओं के जाने के बाद ग्रामीण फिर बाढ़ की विभीषिका से जूझने को मजबूर हो जाते हैं ग्रामीणों की माने तो उनके लिए यह हर साल एक विभीषिका के रूप में आता है और बरसात के बाद समाप्त हो जाता है ग्रामीणों का आरोप है कि अधिकारियों द्वारा जो काम होता है वह मानक के अनुरूप नहीं होता उनका कहना है कि मानक के अनुरूप काम होता तो हर साल हमें बाढ़ की विभीषिका से बचाया जा सकता था लेकिन सरकारी अधिकारी कार्यों को सही ढंग से नहीं करते जिससे हर साल बाढ़आता है और बंधे पर रहने को ग्रामीण मजबूर होते हैं वर्ष 2002 में बाढ़ की विभीषिका से प्रभावित अमवा बक्सर टोला के ग्रामीण अभी भी झोपड़ी डालकर रहने को विवश है आज तक शासन द्वारा उन्हें कहीं जमीन आवंटित नहीं की गई और बंधे के किनारे ही रहने को विवश है इस संबंध में एसडीएम ए आर फारुकी का कहना है कि कटान प्रभावित तमाम लोगों को जमीन उपलब्ध कराई जा चुकी है जो बचे हैं उनकी जांच कराकर यथासंभव उनके लिए जमीन आवंटित करने का प्रयास किया जाएगा।

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