भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) ने यावर अली शाह को किया सम्मानित भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) ने यावर अली शाह को किया सम्मानित
* विश्व मानक दिवस पर मिला सम्मान- केंद्रीय राज्य मंत्री श्री अश्विनी कुमार चौबे ने दिया सम्मान * घरेलू प्राकृतिक डाई उत्पादों के लिए... भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) ने यावर अली शाह को किया सम्मानित

* विश्व मानक दिवस पर मिला सम्मान- केंद्रीय राज्य मंत्री श्री अश्विनी कुमार चौबे ने दिया सम्मान

* घरेलू प्राकृतिक डाई उत्पादों के लिए प्रमाणन प्रोटोकॉल तैयार करने में विशिष्ट योगदान के लिए हुए सम्मानित

नई दिल्ली: विश्व मानक दिवस के अवसर पर, भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) ने आज यहां नई दिल्ली में अपने मुख्यालय में घरेलू प्राकृतिक डाई उत्पादों के लिए प्रमाणन प्रोटोकॉल तैयार करने में उत्कृष्ट योगदान हेतु श्री यावर अली शाह को सम्मानित किया। उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण और पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री श्री अश्विनी कुमार चौबे ने उन्हें सम्मानित किया। इस अवसर पर ‘बेहतर विश्व के लिए साझा दृष्टिकोण’ मानकों के विषय पर एक दिवसीय कार्यक्रम का आयोजन भी हुआ।इस अवसर पर मानव निर्मित रेशे, कपास और उनके उत्पाद के लिए गठित प्रोडक्ट्स सेक्शनल कमेटी टीएक्सडी 7 को कमेटी ऑफ द ईयर का अवार्ड दिया गया। जिसमें श्री यावर अली शाह को उत्कृष्टता का प्रमाण पत्र व डॉ सुजाता सक्सेना, डॉ एन एन महापात्रा, डॉ पदम श्री वांकारी, डॉ एम एस परमार, डॉ बॉस्को हेनरी, प्रो. सरफराज ए वानी, डॉ आसिफ हसन सोफी, श्री सचिन कुलकर्णी, श्री प्रकाश एन भाटी, श्रीमती सुमी सेबेस्टियन, डॉ बेट्टी दास गुप्ता व श्री मयूर बासुकी को प्रशंसा पत्र देकर सम्मानित किया गया।श्री यावर अली शाह भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) ने घरेलू प्राकृतिक डाई उत्पादों के लिए सर्टिफिकेशन प्रोटोकॉल तैयार करने के लिए एक विशेष पैनल के ‘प्रोजेक्ट लीडर कम कन्वीनर’ के रूप में नामित हैं। पूरे विश्व मे यह ऐसा पहला प्रोजेक्ट है, जिसके तहत प्राकृतिक डाई उत्पादों के लिए सर्टिफिकेशन प्रोटोकॉल तैयार किया गया है। श्री शाह एएमए हर्बल के को फाउंडर और सीईओ भी हैं। वे बीते कई वर्षों से सतत विकास के लिए प्राकृतिक संसधानों के प्रगोग व पर्यावरण संरक्षण के लिए मुहिम चला रहे हैं। यह उनका ही योगदान है कि भारत मे एक बार फिर टेक्सटाइल इंडस्ट्री ने केमिकल डाइज के स्थान पर प्राकृतिक डाई के प्रयोग पर विशेष ध्यान देना शुरू किया है। वे पिछले 7 वर्षों से टेक्सटाइल स्पेशलिटी केमिकल्स एंड डाई स्टफ्स सेक्शनल कमेटी ‘ से संबद्ध हैं। उन्होंने प्राकृतिक रंगों (जैसे प्राकृतिक इंडिगो, रुबिया मदार, कैटेचु, लाख, पुनिका ग्रेनाटम, रुम इमोडी, कन्ना इंडिका, गुलमेहंदी, सागौन, अर्जुन बार्क) पर 3 नए भारतीय मानकों के निर्माण में उत्कृष्ट योगदान दिया है और विभिन्न भारतीय मानकों के संशोधन में भी योगदान दिया है। मानक प्रचार गतिविधि के हिस्से के रूप में, श्री शाह ने समय-समय पर “वस्त्रों के लिए रंग” विषय पर वेबिनार भी आयोजित किया।वर्किंग ग्रुप आईएसओ-टीसी 38/डब्लूजी टेक्सटाइल्स के लिए प्राकृतिक सामग्री में प्रोजेक्ट लीडर के रूप में काम करते हुए, भारत ने प्राकृतिक रंगों पर आईएसओ स्तर पर 3 मानक तैयार किए हैं। इनमें मैडर, केचु, लाख, पुनिका ग्रेनाटम पर मानक शामिल हैं। टीएक्सडी 07 टेक्सटाइल स्पेशलिटी केमिकल्स एंड डाईस्टफ्स सेक्शनल कमेटी, टीएक्सडी 07 के सक्रिय सदस्य के रूप में श्री शाह ने डाइस्टफ्स और ऑक्जिलरीज पर मानकों के संशोधन में भी योगदान दिया है। बीआईएस की मानक प्रचार गतिविधि के हिस्से के रूप में श्री शाह ने आजादी का अमृत महोत्सव के 75 वर्ष की पूर्व संध्या पर वस्त्रों के लिए रंग पर एक वेबिनार आयोजित करने में योगदान भी दिया है।इस अवसर पर बोलते हुए श्री यावर अली शाह ने कहा, “यह सम्मान मिलना मेरे लिए गर्व की बात है और सतत विकास के लिए टेक्सटाइल इंडस्ट्री में नेचुरल डाइज के प्रयोग के लिए प्रोटोकॉल विकसित करने की बात हम रखते आ रहे हैं, यह उस तथ्य को भी प्रमाणित करता है। यह विशेष रूप से आईएसओ मानकों को बनाने की पूरी टीम की जिम्मेदारी और सम्मान है।”उन्होंने बताया, “प्राकृतिक रंगाई विकल्प के लिए हमारे पास कई प्राकृतिक अवयव मौजूद है। उत्पादन प्रक्रिया में यदि कार्बन फुटप्रिंट में कमी लानी हो तो कई चीजों के साथ-साथ बहुत अधिक धन की आवश्यकता होगी। लाइफ साइकल एनालिसिस (एलसीए) रिपोर्ट में भी यह बात सामने आई है कि प्राकृतिक डाइज के प्रयोग से सिंथेटिक डाइज की तुलना में कार्बन फुटप्रिंट कई गुना तक कम किया जा सकता है। यदि हमें सतत विकास के उद्देश्य को प्राप्त करना है तो इसके लिए आज से ही प्रयास करने होंगे।

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