बज़्म अरमुगान-ए-अदब अंबेडकरनगर के तत्वाधान में ऑनलाइन मुशायरा संपन्न बज़्म अरमुगान-ए-अदब अंबेडकरनगर के तत्वाधान में ऑनलाइन मुशायरा संपन्न
राजेश तिवारी किछौछा(अम्बेडकरनगर)।बज़्म अरमुगान-ए-अदब अंबेडकरनगर के तत्वाधान में मिसरा (पंक्ति) तरह पर आधारित ऑनलाइन मुशायरा शनिवार की रात आठ बजे खालिद आजम के संरक्षण... बज़्म अरमुगान-ए-अदब अंबेडकरनगर के तत्वाधान में ऑनलाइन मुशायरा संपन्न

राजेश तिवारी

किछौछा(अम्बेडकरनगर)।बज़्म अरमुगान-ए-अदब अंबेडकरनगर के तत्वाधान में मिसरा (पंक्ति) तरह पर आधारित ऑनलाइन मुशायरा शनिवार की रात आठ बजे खालिद आजम के संरक्षण तथा सितारे उर्दू एवार्ड से सम्मानित मोहम्मद शफी नेशनल इंटर कॉलेज हंसवर के शिक्षक मोहम्मद असलम खान की अध्यक्षता तथा दिल सिकंदरपुरी के संचालन में हुए मुशायरे का आगाज नाते पाक से हुआ। मुशायरे की अध्यक्षता कर रहे शिक्षक मोहम्मद असलम खान ने कहा कि उर्दू आपसी रिश्तो को जोड़ती है।और वह वतन से मोहब्बत का पैगाम देती है। इसलिए मुशायरों ने हमेशा लोगों को अपनी तरफ आकर्षित किया है।खालिद आजम ने कहा कि मुल्क की आजादी में उर्दू ने अहम किरदार अदा किया है। उर्दू साझी विरासत की दौलत है,उसकी मिठास के सब दीवाने हैं। संयोजक अशहर हमीदी ने कहा कि उर्दू का लहजा प्यार व मोहब्बत से ढला हुआ है। उर्दू ने आपसी सौहार्द पर बल दिया है।मुशायरे में खालिद आजम ने शेर पढ़ा कि शौक देखो जरा अमीरों का, मछलियां कांच के मकान में हैं।आजाद जमीर लखनवी ने कहा हम तो कमजोर कब रहे लेकिन,इख्तेलाफात खानदान में हैं।अशहर हमीदी ने कहा पल में तकदीर रूठ जाती है, मोहतरम आप किस गुमान में हैं।जफर फैजाबादी ने कहा ये सितारे जो आसमान में हैं, क्या पता कितनी खींच तान में हैं।डॉ.काजिम रजा ने कहा कैसे तारीफ मैं करूं, ख़ूबियां जो तेरे बयान में हैं।शाकिर सुल्तानपुरी ने कहा लुट भी सकती है यह शहंशाही, मोहतरम आप किस गुमान में हैं।तौफीक फाखरी ने कहा मुफ्त खोरी है काहिली का सबब,कौम के लोग किस गुमान में हैं।रईस जलालपुरी ने कहा अपने मां बाप की करो इज्जत,तज़केरा बारहा कुरान में है।जहीर हसन अकबरपुरी ने कहा हर तरफ नूर का बसेरा है,आप जब से मेरे मकान में हैं।तारिक मुस्तफा इल्तेफात गंजवी ने कहा मुझसे मेरा खुलूस मत छीनो,मेरे दुश्मन मेरी अमान में हैं।रहमान मोहसिन इल्तेफात गंजवी ने कहा सुन के आंखों में आ गए आंसू, दर्द कितने तेरे बयान में है।दिलशाद सिकंदरपुरी ने कहा एक दीवार उठ गई जब से नफरत ए सब मेरी दालान में है।इसके अलावा अहमद सिकंदरपुरी,असलम सिकंदरपुरी आदि शायरों ने अपना कलाम पेश किया।

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