हाईटेक शिष्यों ने तकनीक के सहारे  किया गुरु वंदन हाईटेक शिष्यों ने तकनीक के सहारे  किया गुरु वंदन
ओम शंकर पाण्डेय अयोध्या ।प्रशासनिक बंदिशों के चलते आज राम नगरी अयोध्या में गुरु पूर्णिमा का पर्व बेहद सामान्य तरीके से मनाया गया। शहर... हाईटेक शिष्यों ने तकनीक के सहारे  किया गुरु वंदन

ओम शंकर पाण्डेय

अयोध्या ।प्रशासनिक बंदिशों के चलते आज राम नगरी अयोध्या में गुरु पूर्णिमा का पर्व बेहद सामान्य तरीके से मनाया गया। शहर में प्रवेश के सभी रास्तों पर तैनात पुलिसकर्मियों की मौजूदगी के चलते स्थानीय शिष्यों ने ही अपने गुरु के दर्शन पूजन का लाभ उठाया हालांकि तकनीक के सहारे बाहर के शिष्यों ने अपने गुरुओं की चरण वंदना जरूर की। गुरु पूर्णिमा का पर्व जिले के लिए एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम होता रहा है ,हर वर्ष गुरु पूर्णिमा के दिन लाखों की तादाद में शिष्य अपने गुरु के पूजन अर्चन के लिए अयोध्या में उमड़ पड़ते थे, बड़े-बड़े नेताओं पुलिस अफसरों व अन्य महत्वपूर्ण पदों पर कार्यरत शिष्य  श्रद्धा के साथ अयोध्या पहुंचकर गुरु पूजन के कार्यक्रम को सफल बनाते रहे, परंतु इस बार करोना के चलते बदली परिस्थितियों में प्रशासन ने सख्ती करते हुए अयोध्या में भीड़ भाड़ करने पर पूरी तरह से रोक लगा दी है, इसके लिए जिले की सभी सीमाओं को सील करते हुए चप्पे-चप्पे पर पुलिस व्यवस्था करते हुए लोगों को अयोध्या आने से रोका जा रहा है हालांकि स्थानीय लोगों को गुरु पूर्णिमा के अवसर पर पूजन अर्चन करने की छूट मिली हुई थी लेकिन फिर भी अयोध्या में आज गुरु पूर्णिमा का वह दृश्य नहीं देखने को मिला जो पिछले कई वर्षों से देखने को मिलता रहा है ।गुरु दर्शन के लिए इस बार शिष्यों ने अत्याधुनिक तकनीकों का भी प्रयोग किया।लोगों ने वीडियो कॉलिंग के जरिए अपने मोबाइल से अपने गुरु का पूजन अर्चन किया।  मठ मंदिरों में आज सामान्य से भी कम भीड़ नजर आई ।लोगों ने पूजन अर्चन के लिए अपने गुरु के पास पहुंचने का प्रयास तो किया लेकिन प्रशासनिक बंदिशों के चलते तमाम लोग नगर में प्रवेश नहीं कर पाए ।  2005 में अयोध्या में हुए आतंकी हमले के मद्देनजर भी प्रशासन ने कल से सख्ती बढ़ा दी थी जिसके चलते आज पूरे दिन लोगों का अयोध्या में प्रवेश बड़े ही मुश्किल तरीके से होता रहा। स्थानीय लोगों को छोड़कर शेष बाहरी लोगों को अयोध्या में प्रवेश नहीं दिया गया ।नगर के हनुमानगढ़ी मणिराम दास छावनी कनक भवन समेत नगर के छोटे-छोटे मंदिरों पर भी बेहद कम तादाद में शिष्यों का आवागमन देखा गया।

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