आज भी है श्रावण मास में मणि पर्वत पर झूलन उत्सव मनाने का प्रचलन आज भी है श्रावण मास में मणि पर्वत पर झूलन उत्सव मनाने का प्रचलन
अयोध्या में प्राचीन सावन झूला मेला प्रसिद्ध है। यह झूलनोत्सव श्रावण महीने में अयोध्या के मणि पर्वत पर आयोजित किया जाता है। मान्यता है... आज भी है श्रावण मास में मणि पर्वत पर झूलन उत्सव मनाने का प्रचलन

अयोध्या में प्राचीन सावन झूला मेला प्रसिद्ध है। यह झूलनोत्सव श्रावण महीने में अयोध्या के मणि पर्वत पर आयोजित किया जाता है। मान्यता है कि मिथिला कि राजा जनक ने अपनी पुत्रियों को उपहार स्वरूप दिया था। इसे अयोध्या में मणि पर्वत पर स्थापित किया गया। बाद में राम और सीता श्रावण मास में यहां झूला झूलने आते थे।इसी मान्यता के चलते अयोध्या में श्रावण मास में मणि पर्वत पर झूलन उत्सव मनाने का प्रचलन आज भी है। श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को अयोध्या में मणि पर्वत को झूलनोत्सव आयोजित किया जाता है। इसके साथ ही सावन मेले की शुरुआत होती है।वही संतों ने श्रावण में कांवड़ियों और अयोध्या पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को घरों में रहकर पूजा करने की अपील की है। रामलला के मुख्य पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास ने कहा है कि लोगों को वैश्विक महामारी से बचने का जतन करना चाहिए। भीड़-भाड़ वाले स्थानों पर जाने से बचना चाहिए। आचार्य सत्येंद्र दास ने इस बार श्रावण मास में श्रद्धालुओं से घरों में रहकर मानसिक पूजा करने की अपील की है। वहीं खड़ेश्वरी मंदिर के महंत दिलीप दास त्यागी ने कहा है कि हमें शासन और प्रशासन के निर्देशों का पालन करना आवश्यक है. इस समय देश वैश्विक महामारी के संकट से जूझ रहा है। उन्होंने पूरी देश के श्रद्धालुओं से पूजा पाठ करने की अपील की है। महंत दिलीप दास त्यागी ने कहा है कि श्रद्धालु जहां पर है वहीं रहें और वैश्विक महामारी में बाहर निकलने से बचने का प्रयास करना चाहिए।

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