अपने ही कर रहे भाजपा की छीछालेदर अपने ही कर रहे भाजपा की छीछालेदर
इन्द्र नारायण तिवारी सुल्तानपुर भाजपा यूपी के सुल्तानपुर में सांसत में है। पालिका में चेयरमैन की कुर्सी भाजपा के पास है बावजूद  भ्रष्टाचार को... अपने ही कर रहे भाजपा की छीछालेदर


इन्द्र नारायण तिवारी

सुल्तानपुर
भाजपा यूपी के सुल्तानपुर में सांसत में है। पालिका में चेयरमैन की कुर्सी भाजपा के पास है बावजूद  भ्रष्टाचार को मुद्दा बनाकर भाजपाई पालिकाध्यक्ष और सभासद आपस में ही तीर-कमान लेकर भिड़े पड़े हैं। जनता में पार्टी की जमकर छीछालेदर हो रही है। डेढ़ माह से हो रही फजीहत के बाद अब ‘डैमेज कंट्रोल’  के लिये शासन ने गुरुवार को चेयरमैन की हुक्म-उदूली के आरोपी पालिकाधिकारी (ईओ) रवींद्र कुमार को हटा दिया। वहीं अनियमितता व भ्रष्टाचार को लेकर शासन स्तर पर चल रही  जांच के दौरान पालिकाध्यक्ष बबिता जायसवाल की शुक्रवार की पेशी भी फिलहाल टाल दी है।सुलतानपुर पालिका में भ्रष्टाचार के मुद्दे पर भाजपा अजब लड़ाई लड़ रही है। पालिकाध्यक्ष बबिता जायसवाल व उनके पति जिला पंचायत सदस्य अजय जायसवाल अपने अलग स्वभाव व अड़ियल अंदाज की वजह से पार्टी के भीतर भी मुद्दों को लेकर भिड़ते रहते हैं। जिससे जिम्मेदार नेता भी उनसे प्रायः खुश नहीं रहते लेकिन जनता में पालिकाध्यक्ष दंपती ने अपनी इन्हीं विशिष्टताओं को लेकर अलग पहचान भी बना रखी है।..लेकिन इसबार पालिका में उनकी अपनी पार्टी के सभासदों ने ही घेर लिया है। २५ सदस्यों वाले सदन में यूं तो भाजपा के ८ सदस्य हैं लेकिन इनमें पचास फीसद यानी ४ अपनी ही पार्टी के चैयरमैन से खफा हो गए और रीति-नीति को मुद्दा बना गैर भाजपाई सभासदों के साथ मिलकर अपनी ही सरकार का प्रतिनिधित्व करने वाली पालिकाध्यक्ष का बजट प्रस्ताव गिरा दिया। यही नहीं जब गैर भाजपाई सभासदों ने पालिकाध्यक्ष पर अनियमितता व भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए शासन में शिकायत की तो वहां भी भाजपा के आधे सभासद विपक्षियों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर पार्टी के पालिकाध्यक्ष पर कार्रवाई की मांग में आगे आ गए। स्थानीय स्तर पर आमजनों के मध्य भाजपा की खूब छीछालेदर हुई। अनुशासन और शुचिता के नामपर राजनीति करने वालों ने एकदूसरे पर खूब कीचड़ उछाला। फ़ेसबुक और व्हाट्सअप पर भी खुलेआम आरोप-प्रत्यारोप चले। चेयरमैन पर निर्माण और टेंडर आदि को लेकर अनियमितता-भ्रष्टाचार की लंबी शिकायत स्थानीय प्रशासन से होती हुई शासन तक जा पहुंची।..लेकिन पालिकाध्यक्ष निर्विकार रहे ! ये कहकर कि ‘भ्रष्टाचार कतई नहीं होने दूंगा’ ! जंग बताकर जो लड़ाई लड़ी जा रही वो सिर्फ दबाव की राजनीति है। मैं दबने वाला नहीं, चाहे कुर्सी रहे या जाए।’ पार्टी जिलाध्यक्ष डॉ आरए वर्मा ने भी दोनों पक्षों को समझाने-बुझाने की कोशिश की लेकिन नतीजा सिफर रहा। हालांकि अनुशासन को तार-तार करने वाली इस लड़ाई को पार्टी के जिम्मेदार भी बस सांस रोक कर देखते ही रहे। कोई कार्रवाई या लिखापढ़ी की जरूरत नहीं महसूस की।  प्रशासन भी पीछे नहीं रहा इस लड़ाई को हवा देने में।..आखिरकार हो रहे नुकसान को हाईकमान ने भांपा, ऐसा लगता है ! ईओ रवींद्र कुमार का फर्रुखाबाद तबादला इसी नजरिये से देखा जा रहा है। जबकि नगर विकास सचिव के दरबार में शिकायतों को लेकर शुक्रवार की तलबी भी २८ जुलाई तक टाल दिया जाना भी ऐसा ही संकेत दे रही है।

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