तमसा नदी के अस्तित्व को चुनौती दे रहे हैं भू माफिया तमसा नदी के अस्तित्व को चुनौती दे रहे हैं भू माफिया
सुशील मिश्रा अंबेडकरनगर । अकबरपुर भूमाफियाओ और अपराधियों द्वारा सरकारी जमीनों पर किए गए अवैध कब्जे को ध्वस्त कराया जा रहा है तो वहीं... तमसा नदी के अस्तित्व को चुनौती दे रहे हैं भू माफिया

सुशील मिश्रा

अंबेडकरनगर । अकबरपुर भूमाफियाओ और अपराधियों द्वारा सरकारी जमीनों पर किए गए अवैध कब्जे को ध्वस्त कराया जा रहा है तो वहीं दूसरी तरफ जिला मुख्यालय पर अधिकारियों की नाक के नीचे तमसा नदी के अस्तित्व को ही चुनौती दी जा रही है। आए दिन तमसा नदी के दोनों किनारों पर कहीं ना कहीं अवैध रूप से कब्जा किए जाने की बातें सामने आती रहती है लेकिन जिला से लेकर तहसील स्तरीय अधिकारी सब कुछ स्थानीय लेखपालों के भरोसे छोड़ कर मौज फरमाते रहते हैं । विगत कुछ दिनों से जिला मुख्यालय पर पौराणिक तमसा नदी के अस्तित्व को एक बार फिर से चुनौती देने का काम जोर-शोर से जारी है । कभी नदी की धारा को रोकने का प्रयास किया जाता है तो कभी नदी के किनारों को पाट कर उस पर निर्माण किए जाने का प्रयास किया जाता है । मामला संज्ञान में आने के बाद अधिकारी कुछ समय के लिए तो निर्माण कार्य को रुकवा देते हैं लेकिन इसके बाद वही निर्माण कार्य पुनः कैसे प्रारंभ हो जाता है इसकी जानकारी किसी के पास नहीं है । जिला मुख्यालय पर जौहरडीह से लेकर तमसा मार्ग तक तमसा नदी के अस्तित्व को खुली चुनौती दी जा रही है। तहसील के निकट तमसा नदी के कुंड को जिस प्रकार अतिक्रमण की गिरफ्त में लेकर उस पर निर्माण करवा लिया गया है , उसे ध्वस्त कराने के लिए अकबरपुर तहसील के तत्कालीन उपजिलाधिकारी के एल तिवारी आदेश भी जारी कर चुके हैं । उन्होंने अपने आदेश में नदी कुंड की जमीन को तत्काल खाली कराने के निर्देश जारी किए थे लेकिन यह मामला लगभग 10 साल से अधिक समय से मंडलायुक्त के न्यायालय ने लंबित पड़ा हुआ है। उसके बाद से भू माफिया लगातार निर्माण पर निर्माण किए जा रहे हैं। ताजा मामला तमसा मार्ग पर स्थित नदी के किनारों पर किए जा रहे निर्माण को लेकर है । नदी के उत्तरी किनारे पर एक स्थित एक विद्यालय के प्रबंधन पर भी नदी की जमीन पर अवैध रूप से कब्जा किए जाने का मामला समय-समय पर उठता रहा है लेकिन यह प्रकरण तहसील की फाइलों में ही जाकर गुम हो जाता है । ऐसा क्यों हो जाता है यह बताने की आवश्यकता नहीं है। अब नदी के दक्षिणी किनारे पर भी भू माफियाओं की नजर लग गई है तथा नदी की धारा से बिल्कुल सटकर मिट्टी पाटकर नदी की धारा को समेटने का भरसक प्रयास किया जा रहा है । सवाल यह उठता है कि जब नदी की मुख्यधारा से नदी कुंड की चौड़ाई निर्धारित है तो आखिर नदी से बिल्कुल सटकर निर्माण कार्य कैसे और किसकी सह पर कराए जा रहे हैं ।

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