बड़का छोटका सब एक भये बड़का छोटका सब एक भये
जेठ असाढ़ कियो अस यास, बरातहिं रातहिं झंझट भै। केहि भांति सबैजन लोढ़ि परैं,केहि गउर बचें बड़ संकट भै।। बड़का छोटका सब एक भये,झट... बड़का छोटका सब एक भये

जेठ असाढ़ कियो अस यास, बरातहिं रातहिं झंझट भै।

केहि भांति सबैजन लोढ़ि परैं,केहि गउर बचें बड़ संकट भै।।

बड़का छोटका सब एक भये,झट रेलिपरेन लखि सूनि मड़ैया।

टुटिखाट गयी पटचर्र किहेन,तब बोलि पड़ी मुँहढाँकि के मैया।।

भल नाय किह्यो खटिया तोड्यो,बरु नीक भयो सब आय गयो।

जीवत रहिबो बड़ नीक बड़ो,बरसात से आपु बचाय लिह्यो।।

कह ‘राज’ गरीबन कै मड़ई , जँह छाँह सबै जन पाई गयो।

पकवा घर देखि जो भाजि चले, भीजत बरसात भगाय गयो।।

-उदयराज मिश्र9453433900

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