एनटीपीसी टांडा ‘आईसीएच: संकट में भी सेवाधर्म निभाने का जज्बा एनटीपीसी टांडा ‘आईसीएच: संकट में भी सेवाधर्म निभाने का जज्बा
डॉक्टर मनीराम वर्मा अंबेडकर नगर एनटीपीसी के किसी भी स्टेशन के आसपास साफ-सुथरी सफेद वर्दी में पुरुषों को साइकिल पर आते जाते देखा जा... एनटीपीसी टांडा ‘आईसीएच: संकट में भी सेवाधर्म निभाने का जज्बा

डॉक्टर मनीराम वर्मा

अंबेडकर नगर

एनटीपीसी के किसी भी स्टेशन के आसपास साफ-सुथरी सफेद वर्दी में पुरुषों को साइकिल पर आते जाते देखा जा सकता है। कुछ की साइकिल के हैंडल पर खाने के छोटे-छोटे पैकेट भी देखे जा सकते हैं। चाहे धूप कितनी भी तेज हो, या रात कितनी भी ठंडी, ये लोग हमेशा काम र होते हैं। वे इंडियन कॉफी हाउस (आईसीएच), एक सहकारी समिति के कर्मचारी है, जो टाडा सहित कई एनटीपीसी स्टेशनों पर खानपान का प्रबंधन करती है। उनका सिद्धांत सरल है, एनटीपीसी के कर्मचारियों और परिवार के सदस्यों को समय पर स्वच्छ और स्वास्थ्यकर भोजन उपलब्ध कराना, चाहे वह सप्ताह का कोई भी दिन हो।जब अप्रैल में कोविड-19 की दूसरी लहर आई, तो सबके पास घर वापसी का अवसर था। हालांकि, आईसीएच के कर्मचारी तब भी अपने काम के प्रति समर्पित रहे। पहले दिन से वे एनटीपीसी टांडा के आइसोलेशन ब्लॉक में कोविड पॉजिटिव कर्मचारियों और परिवार के सदस्यों को भोजन व चाय पहुंचा रहे हैं। आईसीएच से श्री प्रताप साहू कहते हैं, ‘मैं यहां अपनी पत्नी और 5 साल के बेटे के साथ रहता हूँ। मेरे माता-पिता बूढ़े हैं और आंध्र प्रदेश में रहते जब टांडा में कोविड की स्थिति बिगड़ने लगी तो मैं एक-दो दिन तक गहरे चिंतन में रहा। अंत में मैंने यहीं रहने का फैसला किया। अगर मैं अपने परिवार के साथ अपने घर वापस चला जाता तो शायद में 4 लोगों की जान बचा लेता। भले ही केवल भोजन के माध्यम से, पर यहां रहकर और बीमार कर्मचारियों की देखभाल करके में कई लोगों की जान बचाने में भूमिका निभा सकता हूं।”श्री सयूज कृष्णा एक आईसीएच कर्मचारी हैं जो आइसोलेशन ब्लॉक में रहने वाले कर्मचारियों को यथासमय भोजन पहुंचाते हैं। उन्होंने कहा, “जब महामारी ने हम पर पूरी ताकत से वार किया, तो हमारे पास घर जाने का विकल्प था। पर में रुका रहा क्योंकि मेरे लिए कर्तव्य पहले आता है। यहाँ अस्पताल भी पास में है और मुझे है कि अगर जरूरत पड़ी तो एनटीपीसी मेरी देखभाल करेगा जैसे मैं उसकी देखभाल करता हूं। मैं और मेरे साथी आइसोलेशन ब्लॉक में दिन में तीन बार खाना और दो बार चाय पहुंचा रहे हैं सेट मेन्यू के अलावा, हम लोगों की व्यक्तिगत पसंद का भी ध्यान रख रहे हैं। स्प्राउट्स और अंडे से लेकर हल्दी वाले दूध और काढ़ा तक, हम उनके स्वास्थ्य में सुधार के लिए सभी प्रयत्न कर रहे हैं।”प्रताप और संयूज जैसे लोग न सिर्फ एनटीपीसी के कर्मचारियों की कोविड को हराने में मदद कर रहे हैं, बल्कि अप्रत्यक्ष रूप से उनके मानसिक स्वास्थ्य में भी सुधार ला रहे हैं। एकांत के इस दौर में जब लोगों में उत्साह कम”होता है, बातचीत के कुछ क्षण भी खुशी का स्रोत हो सकते हैं इशिता पोहुजा, कार्यपालक (सीएसआर) बताती हैं, “पिछले महीने कोविड पॉजिटिव होने के बाद में आइसोलेशन ब्लॉक में थी। ऐसा अक्सर होता था की काफी समय तक किसी से बात नहीं हो पाती थी और में उदास महसूस करती थी। ऐसे समय में आईसीएच कर्मचारी जब भी मेरा खाना देने आते थे तो हमेशा मेरा हाल चाल पूछते थे और मेरी पसंद का भी ख्याल रखते थे दो क्षण की इस विनम्र बातचीत से मेरा अकेलापन दूर हो जाता था और मैं खुश हो जाती थी।”एनटीपीसी टांडा के आइसोलेशन ब्लॉक में आईसीएच देखभालकर्ता का पर्याय बन गया है। इसने एक विश्वसनीय स्तंभ के रूप में संकट के इस वक्त में एनटीपीसी टांडा को सहारा दिया है और निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने में योगदान दिया है।

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