वकार भाई का जाना बहुत ही दुखद : सुरेश पाठक वकार भाई का जाना बहुत ही दुखद : सुरेश पाठक
लखनऊ /अयोध्या उर्दू हिंदी दैनिक अवध नामा के मालिक तथा चीफ एडिटर वकार रिजवी की कोरोना से मौत हो जाने पर फैज़ाबाद की आवाज... वकार भाई का जाना बहुत ही दुखद : सुरेश पाठक

लखनऊ /अयोध्या

उर्दू हिंदी दैनिक अवध नामा के मालिक तथा चीफ एडिटर वकार रिजवी की कोरोना से मौत हो जाने पर फैज़ाबाद की आवाज हिंदी दैनिक एवं साप्ताहिक समाचार पत्र तथा टाइम्स टुडेज ऑनलाइन न्यूज़ पोर्टल के संपादक सुरेश पाठक ने गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा है कि वकार भाई की मौत से पत्रकारिता जगत को नुकसान हुआ ही साथ ही मैंने अपना भी एक जिगरी दोस्त और सच्चा हमदर्द खो दिया है। श्री पाठक ने कहा कि वकार भाई एक हंसमुख मिलनसार व्यक्तित्व के धनी थे। सच्चे अर्थों में वह एक सच्चे दोस्त थे। श्री पाठक ने एक वाकये का जिक्र करते हुए बताया कि उनके अखबार फैजाबाद की आवाज का सालाना जलसा था मैंने वकार भाई से फोन पर कहा आपको जलसे में शिरकत करना है तो उनका जवाब था की फैजाबाद तो मेरे दिल में बसा है और फैजाबाद की आवाज बुलावे और मैं न आऊं यह कैसे हो सकता है उस जलसे में वह आए और जब अतिथियों को सम्मानित किया जा रहा था उसमें तरह-तरह के चित्र बने हुए स्मृति चिन्ह थे। जिसमें गणेश जी का चित्र वाला स्मृति चिन्ह भी था मैंने वकार भाई से कहा क्या आप इसे लेना पसंद करेंगे तो उन्होंने कहा इसे ही ले जाऊंगा और इसे अपने घर में सजाऊंगा। उनके शोक में फैजाबाद की आवाज कार्यालय पर एक शोक सभा हुई जिसमें अखबार के स्थानीय संपादक ओम शंकर पांडेय सप्त रत्न दैनिक के जिला संवाददाता गौरव पाठक टाइम्स टुडेज के अश्वनी मिश्रा हलीम फैजी नीलेश विश्वकर्मा मनीष सक्सेना आर्य पुरोहित विनय दुबे जाहिद खां वारसी संदीप पांडे आदि न शोक संवेदना व्यक्त की।

पब्लिक एजूकेशनल कौंसिल आफ़ इन्डिया के चेयरमैन और जामिया उर्दू अलीगढ़ के सेन्टर इंचार्ज डा0 हुसैन मोहसिन ज़ैदी ने मरहूम वकार रिजवी के इनतेकाल को उर्दू सहाफ़त और पूरी मुस्लिम बिरादरी के लिए एक बङा नुकसान बताया। मरहूम मेरे बहुत पुराने दोस्त थे लखनऊ के शिया पी जी कालेज मे एक साथ पढे थे।मरहूम सादा मिजाज़ और कम सुख़न थे उन्होंने अपने अखबार को एक बुलन्दी तक पहुचाया जो सिर्फ लखनऊ ही नहीं पूरे हिन्दुस्तान में मशहूर था। मरहूम कौमी खिदमत में भी बढचढ़ कर लेते थे।हुसैन डे , अली डे , शहर और सूबे मे शिया कौम के जो तालिब इल्म टाप करते थे सूबे के गवर्नर के ज़रिये एवार्ड भी देते थे। मरहूम की जिन्दगी के लिए और उनको जल्द से जल्द शिफ़ा मिले उसके लिए अल्लाह ताला से बहुत दुआएं मांगी गई मगर अल्लाह को जो मंजूर होता है उसको कोई टाल नहीं सकता है। आखिर में अल्हाज हुसैन मोहसिन जैदी ने उनकी माग़फ़रत के लिए अल्लाह ताला से दुआ की और उनके ऐहलेखाना को अपनी ताजियत पेश की है अल्लाह ताला उनको सबरो जमील अता करे।

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