मानव के प्रकार मानव के प्रकार
कर्म के दृस्टि से मानव तीन प्रकार के होते हैं। पूर्व जन्म के संस्कार इस जन्म में भी पीछा नहीं छोड़ते। मानव के कर्म... मानव के प्रकार

कर्म के दृस्टि से मानव तीन प्रकार के होते हैं। पूर्व जन्म के संस्कार इस जन्म में भी पीछा नहीं छोड़ते। मानव के कर्म को देखकर उन्हें पहचाना जा सकता है।

     --: सतकर्मी :--

शांत शिष्ट होते सदा, थोड़े में संतुष्ट।
ईश भजन व दान में सदा रहे संतुष्ट।
अहं द्वेष है लेश नहि, सत कर्मी का रूप।
ईश कृपा मिलती इन्हें, होते धर्म स्वरूप।

      --:राजस  कर्मी:--

धन दौलत की असीम चाह से, रहते सदा है त्रस्त।
वस्त्र स्वच्छ धारण करें, अहंकार से युक्त।
पीट ढिढोरा दान दे, मक्खन बाजो से युक्त।
राजस कर्मी कहते इन्हें, होवें कभी न मुक्त।

      --:   तामस कर्मी:--

निंद्रा भूख काम क्रोध का, मूर्त रूप हैं जान।
स्वार्थ हेतु कुछ भी करें,घोर सहे अपमान।
धर्म अधर्म का ज्ञान नहि, इन्द्रिय सुख की चाह।
तामस कर्मी पहचान यह, चले अनीति की राह।

मेजर डॉ. बलराम त्रिपाठी

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