मेरी कलम से: सवाल लापरवाही का है मेरी कलम से: सवाल लापरवाही का है
सूर्यभान गुप्त मौजूदा समय आलोचना का नहीं। इसके बाद भी साल भर में एक बच्चा कक्षा 11 से 12 में चला जाता है। साल... मेरी कलम से: सवाल लापरवाही का है

सूर्यभान गुप्त

मौजूदा समय आलोचना का नहीं। इसके बाद भी साल भर में एक बच्चा कक्षा 11 से 12 में चला जाता है। साल भर पहले कोरोना संकट से निपटने के लिए बड़े-बड़े दावे किए थे। अंग्रेजों ने केजीएमसी अस्पताल बनवाया कांग्रेश ने AIIMS  बनवाया। समाजवादी पार्टी सरकार लोहिया संस्थान बनवाया। मायावती में अंबेडकरनगर में पीजीआई बनवाया।अब ज्यादा गौर कीजिए राजनाथ सिंह कल्याण सिंह सहित तमाम भारतीय जनता पार्टी लोगों ने क्या बनवाया। जानकारों से जानना चाहता हूं। आजकल के जमाने में रोटी कपड़ा मकान से ऊपर स्वास्थ्य हो गया। मेडिकल स्टोर अस्पताल प्राइवेट अस्पताल देख लीजिए मरीजों से भरे पड़े। और कहीं दवाई नहीं है। कहीं ऑक्सीजन नहीं है कहीं बेड नहीं है कहीं डॉक्टर नहीं है कहीं दवा नहीं। सवाल लापरवाही का है। गोरखपुर में ऑक्सीजन की कमी से बच्चे मर गए। एक डॉक्टर को बलि कर दिया । आइए फैजाबाद के जिला अस्पताल चलते हैं। 44 डॉक्टर चाहिए 22 डॉक्टर मौजूद। दिल के डॉक्टर न्यूरो के डॉक्टर दोनों जनपद में नहीं है। मौजूदा समय में संकट की इस घड़ी में प्राइवेट अस्पतालों को आगे आना चाहिए। आदमी के जीवन की बहुत बड़ी कीमत होती है। स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार कीजिए।

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