संत कंवर राम का जन्म दिवस मनाया संत कंवर राम का जन्म दिवस मनाया
  अयोध्या। शिक्षा मंत्रालय भारत सरकार के नियंत्रण आधीन राष्ट्रीय सिंधी भाषा विकास परिषद द्वारा वित्त पोषित डॉ0 राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय में संचालित अमर शहीद संत कंॅवर राम साहिब सिंधी अध्ययन केंद्र में संत कंॅवर राम का 136 वां जन्म दिवस मनाया गया। अध्ययन केंद्र के मानद निदेशक प्रो0 आरके सिंह ने उनके जीवन की एक कथा सुनाते हुए कहा कि कॅंवर राम उच्च नीच व जाति भेद में भरोसा नहीं रखते थे। एक बार एक अनुसूचित जाति का व्यक्ति संतान कामना से संत के चरणों में बताशो का प्रसाद लेकर उनके भजन में सम्मिलित होने आया। लोगों ने संत के निकट उसे फटकने तक नहीं दिया। कोलाहल सुनकर स्वयं संत उनके पास आए और उसकी मनोकामना जानकर गले लगाते हुए कहा कि यदि उनके गले लगाने से किसी को संतान का सुख प्राप्त होता है तो वह दुनिया के हर बंदे को हजार हजार बार गले लगाने को तैयार हैं।       इस अवसर पर अध्ययन केंद्र के सलाहकार ज्ञाप्रटे सरल ने कहा कि कंॅवर उच्च कोटि के कलावंत थे। प्रसिद्ध गायक के एल सहगल ने एक बार कहा था कंवर को आठवां सुर लगाने में महारत है जबकि आमतौर सूर तो सात ही होते हैं। उन्होंने कहा कि युगों युगों में कोई विरला ही पैदा होता है जो महामानव हो। कंॅवर कलावंत के साथ सौमिता, करुणा, समरसता की प्रतिमूर्ति थे। कंवर के ऐसे 75 गुणों को व्याख्यायित करती पुस्तक को इस अवसर पर कुलपति प्रो0 रविशंकर सिंह को अध्ययन केंद्र की ओर से भेंट की गई। निदेशक प्रो0 सिंह ने कहा कि कंॅवर के कृतित्व को आमजनों से परिचित कराने के लिए अध्ययन केंद्र अपनी गतिविधियां संचालित करता रहेगा। इस अवसर पर सुनीता सेंगर, अरुण सिंह, डाॅ0 देवेश प्रकाश सिंह, डॉ शिवकुमार, डाॅ0 अनिल सिंह, आशीष जैसवाल, अमित वर्मा, पूजा मौर्या, चादनी सिंह, रामनिवास गौड़, महेन्द्र पाल तथा अन्य विद्यार्थी उपस्थित रहे। संत कंवर राम का जन्म दिवस मनाया

 

अयोध्या। शिक्षा मंत्रालय भारत सरकार के नियंत्रण आधीन राष्ट्रीय सिंधी भाषा विकास परिषद द्वारा वित्त पोषित डॉ0 राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय में संचालित अमर शहीद संत कंॅवर राम साहिब सिंधी अध्ययन केंद्र में संत कंॅवर राम का 136 वां जन्म दिवस मनाया गया। अध्ययन केंद्र के मानद निदेशक प्रो0 आरके सिंह ने उनके जीवन की एक कथा सुनाते हुए कहा कि कॅंवर राम उच्च नीच व जाति भेद में भरोसा नहीं रखते थे। एक बार एक अनुसूचित जाति का व्यक्ति संतान कामना से संत के चरणों में बताशो का प्रसाद लेकर उनके भजन में सम्मिलित होने आया। लोगों ने संत के निकट उसे फटकने तक नहीं दिया। कोलाहल सुनकर स्वयं संत उनके पास आए और उसकी मनोकामना जानकर गले लगाते हुए कहा कि यदि उनके गले लगाने से किसी को संतान का सुख प्राप्त होता है तो वह दुनिया के हर बंदे को हजार हजार बार गले लगाने को तैयार हैं।

      इस अवसर पर अध्ययन केंद्र के सलाहकार ज्ञाप्रटे सरल ने कहा कि कंॅवर उच्च कोटि के कलावंत थे। प्रसिद्ध गायक के एल सहगल ने एक बार कहा था कंवर को आठवां सुर लगाने में महारत है जबकि आमतौर सूर तो सात ही होते हैं। उन्होंने कहा कि युगों युगों में कोई विरला ही पैदा होता है जो महामानव हो। कंॅवर कलावंत के साथ सौमिता, करुणा, समरसता की प्रतिमूर्ति थे। कंवर के ऐसे 75 गुणों को व्याख्यायित करती पुस्तक को इस अवसर पर कुलपति प्रो0 रविशंकर सिंह को अध्ययन केंद्र की ओर से भेंट की गई। निदेशक प्रो0 सिंह ने कहा कि कंॅवर के कृतित्व को आमजनों से परिचित कराने के लिए अध्ययन केंद्र अपनी गतिविधियां संचालित करता रहेगा। इस अवसर पर सुनीता सेंगर, अरुण सिंह, डाॅ0 देवेश प्रकाश सिंह, डॉ शिवकुमार, डाॅ0 अनिल सिंह, आशीष जैसवाल, अमित वर्मा, पूजा मौर्या, चादनी सिंह, रामनिवास गौड़, महेन्द्र पाल तथा अन्य विद्यार्थी उपस्थित रहे।

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