गुरू के बिना नहीं समझ सकते जीवन का सार: राधेश शास्त्री गुरू के बिना नहीं समझ सकते जीवन का सार: राधेश शास्त्री
गोसाईगंज अयोध्या/ बसोहरी गोपालपुर गुरूकी महत्ता हमारे जीवन में अनुपम है क्योंकि गुरू के बिना हम जीवन का सार ही नहीं समझ सकते हैं।... गुरू के बिना नहीं समझ सकते जीवन का सार: राधेश शास्त्री

गोसाईगंज अयोध्या/ बसोहरी गोपालपुर गुरूकी महत्ता हमारे जीवन में अनुपम है क्योंकि गुरू के बिना हम जीवन का सार ही नहीं समझ सकते हैं। लेकिन हमेशा इस बात का सदैव ही ध्यान रखना चाहिए कि गुरू के समक्ष चंचलता नहीं करनी चाहिए और सदा ही अल्पवासी होना चाहिए। जितनी आवश्यकता है उतना ही बोलें और जितना अधिक हो सके गुरू की वाणी का श्रवण करें। यह विचार बसोहरी गोपालपुर में सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा के दूसरे दिन सोमवार को कथा व्यास पंडित राधेश शास्त्री महाराज (वृंदावन) कहा, उन्होंने आगे कथा में बताया कि मनुष्य से गलती हो जाना बड़ी बात नहीं। लेकिन ऐसा होने पर समय रहते सुधार और प्रायश्चित जरूरी है। ऐसा नहीं हुआ तो गलती पाप की श्रेणी में आ जाती है। श्रीमद् भागवत कथा के मुख्य यजमान कमला प्रसाद पांडे पत्नी मालती पांडे के तत्वाधान में चल रहा है।
कथा व्यास शास्त्री ने पांडवों के जीवन में होने वाली श्रीकृष्ण की कृपा को बड़े ही सुंदर ढंग से दर्शाया। कहा कि परीक्षित कलियुग के प्रभाव के कारण ऋषि से श्रापित हो जाते हैं। उसी के पश्चाताप में वह शुकदेव जी के पास जाते हैं। भक्ति एक ऐसा उत्तम निवेश है, जो जीवन में परेशानियों का उत्तम समाधान देती है। साथ ही जीवन के बाद मोक्ष भी सुनिश्चित करती है। कथा व्यास राधेश जी ने कहा कि द्वापर युग में धर्मराज युधिष्ठिर ने सूर्यदेव की उपासना कर अक्षयपात्र की प्राप्ति किया। हमारे पूर्वजों ने सदैव पृथ्वी का पूजन व रक्षण किया। इसके बदले प्रकृति ने मानव का रक्षण किया। भागवत के श्रोता के अंदर जिज्ञासा और श्रद्धा होनी चाहिए। परमात्मा दिखाई नहीं देता है वह हर किसी में बसता है। 

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