….. हंसी-खुशी सब रहते ….. हंसी-खुशी सब रहते
डॉक्टर अस्पताल की संख्या, नित ही बढ़ती जाती।रोग अनेकों नए जनमते, दवा नहीं हो पाती। बच्चे बूढ़े व युवान, सभी रोग से लड़ते।दवा पे... ….. हंसी-खुशी सब रहते

डॉक्टर अस्पताल की संख्या, नित ही बढ़ती जाती।
रोग अनेकों नए जनमते, दवा नहीं हो पाती।

बच्चे बूढ़े व युवान, सभी रोग से लड़ते।
दवा पे भोजन से ज्यादा खर्चा, नित ही हम हैं करते।

दवा से पहले जांच कराने में, शि र पर हाथ फिराते।
कमीशन डॉक्टर का बनता, मरीज मूर्ख बन जाते।

पहले मोटे दाने खाकर, स्वास्थ्य निखरता रहता।
सुबह से लेकर शाम समय तक, श्रम सीकर तन से बहता।

रोग दोष का नाम न होता, हंसी-खुशी सब रहते।
संयम पूर्वक जो नर रहते, औषधि वत भोजन करते।

श्रम को जीवन का अंश बनाते, राग द्वेष से बचते।
शत वर्षों तक जीवित रहते, सहयोग सभी का करते।

संयम विवेक को अभी से पकड़ो, तभी स्वस्थ रह सकते।
मन को सदा उदात्त रखने से, रोग नहीं तन लगते।
राम नाम या किसी मंत्र में, मन का विलय कर सकते।

मेजर डॉ. बलराम त्रिपाठी

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