फिर मिलकर हम खेलें होली फिर मिलकर हम खेलें होली
बचपन की गलियों की होलीचेहरे पर खुशियों की रोली अपनों की वो हंसी ठिठोलीयारों की मनमौजी टोली..।। रंग गुलाल की वो बौछारेंआज भी गीला... फिर मिलकर हम खेलें होली

बचपन की गलियों की होलीचेहरे पर खुशियों की रोली

अपनों की वो हंसी ठिठोलीयारों की मनमौजी टोली..।।

रंग गुलाल की वो बौछारेंआज भी गीला कर जाती हैं

कानों में अब भी आती हैंयारों की वो मीठी बोली..।।

काश कभी हम फिर मिल पाते सबको अपने गले लगाते

बारिश का मौसम कुछ बनता फिर आँखें हो जातीं गीली..।।

आ जाओ मेरे यारों तुमफिर से बचपन की गलियों में

यादें फिर ताज़ा हो जायेंफिर मिलकर हम खेलें होली..।।

फिर मिलकर हम खेलें होली..।।

***विजय कनौजिया*******

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