होली आई होली आई होली आई होली आई
होली आई होली आईहोली आई आज मेरे द्वारमिलने जाएगे सखा सहेली और पुराने यारशोर से गली मोहल्ला सराबोर हैंहोली गीत के बजते ढोल हैंकोई... होली आई होली आई


होली आई होली आई
होली आई आज मेरे द्वार
मिलने जाएगे सखा सहेली और पुराने यार
शोर से गली मोहल्ला सराबोर हैं
होली गीत के बजते ढोल हैं
कोई बजाये ढोलक कोई मजीरे
कोई लिए रंग गुलाल हाथ में
कोई भरे पिचकारी
कोई झूमे भंग के नशे में
कोई फगुआ के गीतों से
दिल से दिल मिल जाये
लगाये सबको रंग गुलाल
और गले लग जाये
पौधे पंछी यही राग गए
रंग रंगीला होली का त्यौहार
भूल के सारे शिकवे शिकायते
सज जाये यादें मिल जाये यार।

डिम्पल राकेश तिवारी
अवध यूनिवर्सिटी चौराहा
अयोध्या।

Times Todays News

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