अम्बेडकर नगर के  वीर चक्र विजेता राइफल मैन धनुषधारी सिंह अम्बेडकर नगर के  वीर चक्र विजेता राइफल मैन धनुषधारी सिंह
हरी राम यादव फैजाबादी पुण्यतिथि पर विशेष: वीर चक्र विजेता राइफल मैन धनुषधारी सिंह का जन्म 29 अक्टूबर 1927को तमसा नदी की गोद में... अम्बेडकर नगर के  वीर चक्र विजेता राइफल मैन धनुषधारी सिंह

हरी राम यादव फैजाबादी

पुण्यतिथि पर विशेष:

वीर चक्र विजेता राइफल मैन धनुषधारी सिंह का जन्म 29 अक्टूबर 1927को तमसा नदी की गोद में बसे गांव सोनांवा  पोस्ट खेमापुर में  श्री धनराज सिंह तथा श्रीमती सुखना देवी के यहां हुआ था।  उस समय यह गांव फैजाबाद जिले में आता था। उस समय कौन जानता था कि जिस बालक का नाम धनुषधारी रखा जा रहा है वह एक दिन “यथा नामे, तथा गुणे” को चरितार्थ करके पूरे देश में अपने गांव के नाम को रोशन करेगा। 
       देश प्रेम के जज्बे ने इनको सेना में जाने के लिए उत्प्रेरित किया और  29 अक्टूबर 1946 को सोनांवां का यह लाल भारतीय सेना कीराजपूताना राइफल का हिस्सा बन गया।  
    15 अगस्त 1947 को देश का बंटवारा हुआ और भारत तथा पाकिस्तान दो राष्ट्र अस्तित्व में आये। कश्मीर के मुद्दे को लेकर पाकिस्तान ने कबाइलियों के बेष में अपनी नियमित सेना के सैनिकों द्वारा भारत पर आक्रमण कर दिया। भारत सरकार ने भी 22 अक्टूबर 1947 को युद्ध की घोषणा कर दी। इनकी पलटन को युद्ध भूमि में जाने का आदेश मिल गया। 
महज 01 साल 04 महीने की सेना की नौकरी और 20 साल 04 महीने की उम्र,  न  जिंदगी का ज्ञान और न रण कौशल का अनुभव। लेकिन अम्बेडकर नगर के इस वीर ने वह कर दिखाया जिसे किसी को उम्मीद नहीं थी। अपने  साहस, बीरता और कर्त्तव्य परायणता के बल पर पाकिस्तानी सेना के छक्के छुड़ा दिए।उनकी बीरता और कर्तव्य  परायणता  के लिए भारत सरकार द्वारा उन्हें 25 फरवरी 1948 को मरणोपरान्त बीर चक्र से सम्मानित किया गया। यह सम्मान युद्ध काल का तीसरा सबसे बड़ा सम्मान है।

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