पंचायत चुनाव को लेकर गांवों में सरगर्मी पंचायत चुनाव को लेकर गांवों में सरगर्मी
ज़मीर अहमद पस्ता भेलसर।सरकार द्वारा पंचायत चुनाव कराए जाने के संकेत दिए जाने के बाद से ही गवईं राजनीति चरम पर है इसे लेकर... पंचायत चुनाव को लेकर गांवों में सरगर्मी

ज़मीर अहमद पस्ता

भेलसर।
सरकार द्वारा पंचायत चुनाव कराए जाने के संकेत दिए जाने के बाद से ही गवईं राजनीति चरम पर है इसे लेकर कई गांवों में गुटबाजी भी शुरु हो गई है। मतदाताओं को लुभाने के लिए संभावित प्रत्याशी हर हथकंडा अपना कर प्रेरित कर रहे हैं। इसी क्रम में विकास खंड रुदौली के ग्राम सभा अमराई गांव में प्रधान प्रतिनिधि ने अपना वोट बैंक मजबूत करने के लिए नया तरीका निकाला है। उन्होंने गांव में स्वागत समारोह का आयोजन कर मनरेगा मजदूरों सहित अन्य ग्रामीणों का माल्यार्पण कर अंगवस्त्र वितरित किया। उन्होंने अपना 5 साल के विकास कार्यों का विस्तार से बखान किया यही नहीं उन्होंने अपने कार्य काल में किए गए कार्यों की पत्रिका छपवाकर समस्त ग्राम वासियों के घर घर तक पहुंचाया और ग्रामसभा में ईमानदारी से विकास कार्य कराए जाने का दावा भी किया और कहा कि जनपद में शायद ही ऐसा कोई प्रधान होगा जिसने सीधे जनता के बीच अपना 5 साल का रिपोर्ट कार्ड प्रस्तुत किया होगा। पंचायत चुनाव की विधिवत घोषणा में अभी समय है लेकिन गांवों में प्रधानी व बीडीसी चुनाव का डंका अभी से लोगों के सिर चढ़कर बोलने लगा है। क्षेत्र से सभी गांव पूरी तरह चुनावी मोड में आ गए हैं। होटलों तिराहा चौराहों पर होर्डिंग नजर आने लगी हैं तो गांव के नुक्कड़ों और चौपाल सजने लगी है। दावेदार मतदाताओं के सुख-दु:ख में भागीदार होकर उनकी सेवा में जुटे हैं। प्रधानी चुनाव की तेज होती सरगर्मियों का असर अब गांव-गलियारों में साफ नजर आने लगा है। फिलहाल अभी तक अधिकारिक तौर पर आरक्षण की स्थिति स्पष्ट नहीं होने से प्रधान और जिला पंचायत सदस्य पद के संभावित प्रत्याशी खुलकर प्रचार अभियान में नहीं निकल रहे हैं। उन्हें यह भय सता रहा है कि प्रचार अभियान तेज करने से खर्च बढ़ जाएगा। यदि सीट का आरक्षण बदल गया तो किए कराए पर पानी फिर जाएगा। कुछ दावेदार सीटों का आरक्षण जानने के लिए अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं। दावेदारों में अब आरक्षण सूची को लेकर उहापोह बनी हुई है। संभावित उम्मीदवार सीटों का आरक्षण जानने के लिए जिला पंचायत राज कार्यालय की परिक्रमा कर रहे हैं। वहीं कई लोग बिचौलिए बनकर भावी उम्मीदवारों से उनके मनमाफिक सीट आरक्षित कराने का प्रलोभन दे रहे हैं। वे प्रदेश के दिग्गजों के साथ अपने संबंध जताकर जीत तक का भरोसा दिला रहे हैं। हांलाकि अभी तक आरक्षण की स्थिति स्पष्ट नहीं है शीध्र ही आरक्षण की रिर्पोट आएगी।पंचायत चुनाव मार्च और अप्रैल माह में कराए जाने के सरकार द्वारा संकेत दिए जाने के बाद से पंचायतों में माहौल गर्म हो गया है।
चुनाव के संकेत मिलते ही हरकत में आई पुलिस टीम गांव-गांव जाकर दावेदारों के गुटों पर नजरें गड़ाए हुए है। पुलिस गांव में शांति व्यवस्था कायम रखने के लिए दिन रात एक कर चुनाव संबंधी जानकारी हासिल करने में जुट गई है।

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