छात्र-छात्राओं ने तरूकल्प वृक्ष की संरचना का निर्माण किया छात्र-छात्राओं ने तरूकल्प वृक्ष की संरचना का निर्माण किया
अयोध्या। डॉ0 राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के ललित कला (फाईन आर्ट्स) विभाग  के द्वारा परिसर में नैक मूल्यांकन एवं 25 वें दीक्षान्त समारोह के दृष्टिगत चल रही 25 दिवसीय मूर्तिकला कार्यशाला के तीसरे दिन छात्र-छात्राओं द्वारा ’’तरूकल्प वृक्ष के आर्मेचर की संरचना का निर्माण किया गया। कार्यशाला की संयोजिका सहायक आचार्य पल्लवी सोनी ने बताया कि ’’तरूकल्प वृक्ष के निर्माण के लिए धातुओं जैसे लोहा, स्टील आदि से निर्मित आर्मेचर को मूर्तिकला के विभिन्न कलात्मक तकनीको के आधार पर रूपित किया जा रहा हैं। लोकल आयोजन सचिव सहायक आचार्य रीमा सिंह ने छात्र-छात्राओं को आर्मेचर के निर्माण के लिए प्रयोग में आने वाली मूर्तिकला से संबंधित विभिन्न मशीनों का तकनीकी ज्ञान प्रदान किया।       कार्यशाला की निदेशक डाॅ0 सरिता द्विवेदी ने छात्र-छात्राओं को ’’नवग्रह वाटिका के प्राचीन महत्व से अवगत कराया। विभागीय शिक्षिका सरिता सिंह ने आर्मेचर के निर्माण के समय धातु का प्रयोग करने से संबंधित सुरक्षा नियम से अवगत कराया। प्रशिक्षक आशीष प्रजापति ने मूर्तिकला में प्रयोग होने वाले स्क्रैप मैटल की तकनीकी से छात्र-छात्राओं का परिचय कराया। विभाग के समन्वयक प्रो0 विनोद कुमार श्रीवास्तव ने कुलपति प्रो0 रविशंकर सिंह का आभार व्यक्त करने के साथ ही छात्र-छात्राओं के कार्य की सराहना करते हुए बताया कि इस स्क्रैप मैटल की तकनीक से बनी भव्याकृति विश्वविद्यालय के प्रांगण को सौन्द्रर्य एवं आकर्षण प्रदान करेगी। कार्यक्रम के दौरान प्रो0 आशुतोष सिन्हा, प्रो0 मृदुला मिश्रा, गैर शैक्षणिक कर्मचारी विजय कुमार शुक्ला, शिवशंकर यादव, हीरा यादव, एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहें।  छात्र-छात्राओं ने तरूकल्प वृक्ष की संरचना का निर्माण किया

अयोध्या। डॉ0 राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के ललित कला (फाईन आर्ट्स) विभाग  के द्वारा परिसर में नैक मूल्यांकन एवं 25 वें दीक्षान्त समारोह के दृष्टिगत चल रही 25 दिवसीय मूर्तिकला कार्यशाला के तीसरे दिन छात्र-छात्राओं द्वारा ’’तरूकल्प वृक्ष के आर्मेचर की संरचना का निर्माण किया गया। कार्यशाला की संयोजिका सहायक आचार्य पल्लवी सोनी ने बताया कि ’’तरूकल्प वृक्ष के निर्माण के लिए धातुओं जैसे लोहा, स्टील आदि से निर्मित आर्मेचर को मूर्तिकला के विभिन्न कलात्मक तकनीको के आधार पर रूपित किया जा रहा हैं। लोकल आयोजन सचिव सहायक आचार्य रीमा सिंह ने छात्र-छात्राओं को आर्मेचर के निर्माण के लिए प्रयोग में आने वाली मूर्तिकला से संबंधित विभिन्न मशीनों का तकनीकी ज्ञान प्रदान किया।

      कार्यशाला की निदेशक डाॅ0 सरिता द्विवेदी ने छात्र-छात्राओं को ’’नवग्रह वाटिका के प्राचीन महत्व से अवगत कराया। विभागीय शिक्षिका सरिता सिंह ने आर्मेचर के निर्माण के समय धातु का प्रयोग करने से संबंधित सुरक्षा नियम से अवगत कराया। प्रशिक्षक आशीष प्रजापति ने मूर्तिकला में प्रयोग होने वाले स्क्रैप मैटल की तकनीकी से छात्र-छात्राओं का परिचय कराया। विभाग के समन्वयक प्रो0 विनोद कुमार श्रीवास्तव ने कुलपति प्रो0 रविशंकर सिंह का आभार व्यक्त करने के साथ ही छात्र-छात्राओं के कार्य की सराहना करते हुए बताया कि इस स्क्रैप मैटल की तकनीक से बनी भव्याकृति विश्वविद्यालय के प्रांगण को सौन्द्रर्य एवं आकर्षण प्रदान करेगी। कार्यक्रम के दौरान प्रो0 आशुतोष सिन्हा, प्रो0 मृदुला मिश्रा, गैर शैक्षणिक कर्मचारी विजय कुमार शुक्ला, शिवशंकर यादव, हीरा यादव, एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहें। 

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