प्रश्न न तुमसे कर रही… प्रश्न न तुमसे कर रही…
डिम्पल राकेश तिवारी “राम”हे रामप्रश्न न तुमसे कर रही,आक्षेप न तुमपे धर रही,सत्य कहो हे राम तुमसिय कैसे इतनी कष्टित रहीं?तुम तो भगवान थेसंसार... प्रश्न न तुमसे कर रही…

डिम्पल राकेश तिवारी

“राम”
हे राम
प्रश्न न तुमसे कर रही,
आक्षेप न तुमपे धर रही,
सत्य कहो हे राम तुम
सिय कैसे इतनी कष्टित रहीं?
तुम तो भगवान थे
संसार के श्रीराम थे
कैसे तुम्हारे रहते ही वो
रज-रज धूमिल हुई?
जो थे काँटे तुम्हारे राह के
सिय ने चुना उन्हें नैन से
सहती रही वेंदना सहती रही हर उलहाना
देंकर तुम्हे सर्वस्व मान
कैसे अपमान वो सहती रही।
प्रश्न न तुमसे न कर रही,
आक्षेप न तुमपे धर रही
सत्य कहो हे राम तुम
सिय कैसे हर ली गयीं?
हर श्वास में जो जप रहीं
बस राम राम ही कह रहीं
सत्य कहो हे राम तुम
फिर सिय कैसे कलंकित हुई?
माना की तुम भगवान थे
सिया के चारों धाम थे
सत्य कहो हे राम तुम
सिया ही क्यू चिन्हित हुई?
हे राम मैं प्रश्न न तूमसे कर रही
आक्षेप न तुमपे धर रहीं
सत्य कहो हे राम तुम
क्या मैं भी अनुउत्तरित रह गयी?

Times Todays News

No comments so far.

Be first to leave comment below.

Your email address will not be published. Required fields are marked *